मनरेगा मजदूर संघ ने उठाई चार सूत्रीय मांगें, मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीरनगर-
आज दिनांक 5 अक्टूबर 2026 को मनरेगा मजदूर संघ, इकाई उत्तर प्रदेश (संतकबीरनगर) के बैनर तले मजदूरों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के सापेक्ष जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रदेश स्तर पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और आने वाले 2027 में मुख्यमंत्री को वापस भेज दिया जाएगा।
* समय पर मजदूरी भुगतान और मुआवजा: मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए तथा लंबित मजदूरों का तत्काल भुगतान हो। मजदूरी में अनावश्यक देरी होने पर नियमानुसार मुआवजा/विलंब क्षतिपूर्ति दिलाई जाए और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।
*मनरेगा और VBGRAMG योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए ‘मनरेगा मजदूर संघ’ को निगरानी एवं निरीक्षण का अधिकार दिया जाए।
* बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए मनरेगा/VBGRAMG मजदूरी दर में वृद्धि की जाए। रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करने के लिए मजदूर संघ को भी गदियों की खुदाई, जंगलों के निर्माण तथा संरक्षण जैसे कार्यों का क्रियान्वयन निकाय बनाया जाए।
*VBGRAMG में पर्याप्त कार्य दिवस और श्रमिकों के पास एंड्रॉइड फोन न होने के कारण जॉब कार्डों के नवीनीकरण तथा प्रतिदिन मजदूरी एवं कार्य अंकन में आ रही समस्याओं का हवाला देते हुए ‘डिजिटल हाजिरी व्यवस्था’ को बंद करने की मांग की गई है।
आंदोलन की चेतावनी:
संघ की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक कार्रवाई या संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संतकबीरनगर सहित पूरे उत्तर प्रदेश के मजदूर और कर्मचारी लोकैतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन व प्रदेश-स्तरीय आंदोलन का आयोजन करेंगे। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक और लोकतांत्रिक होगा।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (ग्राम विकास), आयुक्त (ग्राम विकास) और आयुक्त (मनरेगा) उत्तर प्रदेश शासन के साथ-साथ संबंधित जनपद के जिलाधिकारी को भी प्रेषित की गई है।
