केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भव्य विकास प्रदर्शनी, मक्का कृषक गोष्ठी में उमड़े 300 से अधिक किसान।

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– मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में विकास भवन में हुआ भव्य आयोजन।

 – धान-गेहूं से ज्यादा मुनाफा देगी मक्के की खेती, ‘बैच ड्रायर’ से दूर हुई नमी की समस्या।

 – एथेनॉल बनाने के लिए IGL कंपनी खरीद रही मक्का, नाथनगर के किसान प्रति एकड़ ले रहे 35-40 कुंतल पैदावार।

– बड़ी चेतावनी: – बिना ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के किसानों को नहीं मिलेगा सरकारी उर्वरक (खाद) का लाभ।

संत कबीर नगर।

केंद्र सरकार के गौरवमयी 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद में तीन दिवसीय विकास प्रदर्शनी और समेकित जनकल्याण जागरूकता अभियान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। विकास भवन स्थित डीपीआरसी हॉल और परिसर में चल रहे इस शिविर के दूसरे दिन कृषि विभाग द्वारा

‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजना’ के तहत जनपद स्तरीय मक्का विकास कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी में जनपद के विभिन्न विकास खंडों से 300 से अधिक प्रगतिशील किसानों और महिला कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ CDO द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बाल विकास परियोजना, पशुपालन, उद्यान विभाग, इफ्को, कृषि विभाग, एफपीओ और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्टॉल लगाकर किसानों को सरकारी योजनाओं की सीधी जानकारी दी गई।

मृदा स्वास्थ्य को लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, दिए अहम सुझाव।

कृषि विज्ञान केंद्र (बगही) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने आधुनिक खेती और मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:

“अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से हमारी धरती का स्वास्थ्य बुरी तरह खराब हो चुका है। इंसानी स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए पहले मिट्टी की जांच करानी होगी। किसान जैविक खेती अपनाएं और बुवाई से पहले ‘हरी खाद’ (ढैंचा आदि) का प्रयोग अवश्य करें। धान की खेती से पहले ग्रीष्मकालीन जुताई और फसल चक्र में दलहन-तिलहन को शामिल करने से जमीन की उर्वरा शक्ति वापस लौटेगी।”

वहीं, कृषि वैज्ञानिक डॉ. दुर्गेश कुमार ने मक्के की खेती की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मक्के की खेती करके किसान धान और गेहूं की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने किसानों को मक्के की फसल को कीड़ों के प्रकोप से बचाने और बंपर उत्पादन हासिल करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए।

आलू पट्टी अब बनी ‘मक्का हब’, एथेनॉल कंपनियों से सीधा जुड़ाव –

गोष्ठी में नाथनगर विकास खंड के ग्राम तरयापार से आए प्रगतिशील किसान यशवर्धन पांडेय ने सफलता की एक जमीनी कहानी साझा की। उन्होंने बताया:

“पहले नाथनगर के गायघाट क्षेत्र में किसान सिर्फ पारंपरिक रूप से आलू की बुवाई करते थे। लेकिन कृषि विभाग के जागरूकता अभियान के बाद आज पूरा क्षेत्र मक्का उत्पादन का गढ़ बन चुका है। विभाग द्वारा जनपद को ‘बैच ड्रायर’ (दाना सुखाने की मशीन) उपलब्ध कराई गई है, जिससे मक्के में नमी की पुरानी समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है। अब यहां का मक्का सीधे एथेनॉल बनाने वाली आईजीएल (IGL) कंपनी को सप्लाई हो रहा है, जिससे किसानों को सीधा और बंपर मुनाफा मिल रहा है। आज नाथनगर का किसान एक एकड़ में 35 से 40 कुंतल तक मक्के की पैदावार ले रहा है।”

इसी क्रम में सेमारियावा ब्लॉक के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने धान की सीधी बुवाई (DSR तकनीक) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मक्के की खेती के बाद उसके अवशेषों से खेतों में ‘मोथ’ जैसे हानिकारक खरपतवार स्वतः नष्ट हो जाते हैं, जिससे किसानों की लागत घटती है और पैसों की बड़ी बचत होती है।

सरकारी बीजों की बंपर उपलब्धता, ‘ई-लॉटरी’ से होगा चयन ।

जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को राहत देते हुए घोषणा की कि जनपद में सामान्य मिनी किट और प्रदर्शन हेतु पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं। किसान यूपी एग्रीकल्चर पोर्टल पर अपनी बुकिंग कराकर बीज प्राप्त कर सकते हैं। पारदर्शी व्यवस्था के तहत लाभार्थियों का चयन **ई-लॉटरी** के माध्यम से किया जाएगा। वर्तमान में धान, ढैंचा, दलहन, तिलहन के साथ-साथ अरहर, तिल, उड़द और मोटे अनाज (श्री अन्न) के बीज ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध हैं।

अत्यंत महत्वपूर्ण: बिना ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के नहीं मिलेगी खाद !

जिला कृषि अधिकारी ने जनपद में यूरिया, डीएपी सहित सभी उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया और किसानों से किसी भी तरह की अफवाह में न आने की अपील की। हालांकि, उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण वैधानिक चेतावनी भी जारी की:

“जनपद के सभी किसान भाई यह गांठ बांध लें कि बिना ‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) कराए किसी भी किसान को सरकारी उर्वरक (खाद) का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसलिए सभी किसान समय रहते अपनी रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से करा लें।”

कार्यक्रम के समापन पर उप कृषि निदेशक (DDA) ने मुख्य विकास अधिकारी, वैज्ञानिकों और सुदूर क्षेत्रों से आए सभी अन्नदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी के समापन की घोषणा की। इस प्रदर्शनी ने यह साफ कर दिया है कि संत कबीर नगर का किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ तकनीक और मुनाफे की नई राह पर चल पड़ा है।

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