संतकबीर नगर में बड़ा स्वास्थ्य घोटाला ! आयुष्मान योजना के नाम पर चल रहे थे फर्जी अस्पताल, DM के कड़े तेवर से मचा हड़कंप।
- अस्पतालों की खुली पोल, 10 पर गिरी गाज !
संतकबीर नगर –
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में धांधली करने वाले फर्जी और मानकविहीन अस्पतालों पर जिला प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जब जिले के इम्पैनल्ड अस्पतालों की फाइलों की समीक्षा की, तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में 10 बड़े अस्पताल पूरी तरह फर्जी और मानकों को ताक पर रखकर चलते हुए पाए गए, जिसके बाद डीएम ने इन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया है।
जांच टीम की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इन 10 अस्पतालों में न तो डॉक्टर मिले, न ही कोई ट्रेंड स्टाफ और कई तो बिना रजिस्ट्रेशन के ही मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे –
- सेहर मेमोरियल हॉस्पिटल, ग्राम निघुरी बाजार, संत कबीर नगर।
- न्यू केयर हास्पिटल, निकट मेंहदावल बाईपास कॉटी रोड।
- न्यू मेडविन हॉस्पिटल, गोरखर देहात, खलीलाबाद।
- मुनमुन क्लीनिक एण्ड मेटर्निटी हॉस्पिटल, बंगला ताल चौराहा।
- बालाजी हॉस्पिटल, बाईपास खलीलाबाद, संत कबीर नगर।
- जीवन रेखा हॉस्पिटल, ग्राम व पो0 बौर-ब्यास, मेंहदावल।
- सन्स हॉस्पिटल, टेमा रहमत, संत कबीर नगर।
- एम० गोल्ड हॉस्पिटल।
- केयर हॉस्पिटल, समय माता मंदिर के पीछे, खलीलाबाद।
- ओम साई हास्पिटल, निकट जिला अस्पताल, संत कबीर नगर।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० रामानुज कनौजिया ने बताया कि जिले में आयुष्मान योजना से कुल 37 अस्पताल इम्पैनल्ड हैं, जिनमें से 04 को कोई दावा भुगतान नहीं हुआ है। लेकिन शेष 33 में से सबसे ज्यादा मालामाल होने वाले और सबसे अधिक क्लेम उठाने वाले अस्पतालों में रजत हॉस्पिटल (मझौवा पर्वता), एस०आर० हास्पिटल एण्ड पैरामेडिकल (नाथनगर), शम्भू नाथ मेमोरियल (बंधवा), पटेल हॉस्पिटल (भुजैनी) और स्पर्श हॉस्पिटल (भुजैनी) शामिल हैं।
इन सभी अस्पतालों के दावों और भुगतानों की सच्चाई सामने लाने के लिए डीएम ने अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल जांच टीम गठित कर फिर से फाइलें खंगालने का आदेश दे दिया है।
DM की दो टूक –
मानक पूरे नहीं किए तो तुरंत होंगे ‘डी-इम्पैनल्ड’।
जिलाधिकारी ने सीएमओ को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि जिले के सभी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर (OT) के संचालन के लिए डिफाइब्रिलेटर (Defibrillator), फायर सेफ्टी और कम से कम दो निकासी मार्गों (Fire Exits) की अनिवार्यता को दो हफ्ते के भीतर पूरा कराया जाए। यदि तय समय में मानक पूरे नहीं हुए, तो बिना किसीर् नरमी के अस्पतालों को सीधे डी-इम्पैनल्ड (सूची से बाहर) कर दिया जाएगा।
प्रशासन के इस कड़े रुख से झोलाछाप और मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले प्राइवेट अस्पतालों संचालकों में भगदड़ मच गई है।।
