वीरांगना उदा देवी पासी की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा हुआ आयोजित।
# अदम्य साहस का परिचय देने वाली वीरांगना को किया नमन।
हरपुर बुदहट – गोरखपुर ।
गोरखपुर के अनंतपुर चौक पर बैठक कर वीरांगना ऊदा देवी की गौरव गाथा को याद किया गया तथा 1857 की क्रांति में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने अद्भुत शौर्य और बलिदान से इतिहास के पन्नों को गौरवान्वित करने वाली वीरांगना उदा देवी पासी की जयंती आज सहजनवां के हरपुर बुद्धहाट में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।
उदा देवी पासी ने 1857 की क्रांति के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध हथियार उठाकर नारी शक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया था। इतिहासकारों के अनुसार, उन्होंने अवध क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजी सेना को कई मोर्चों पर कड़ी चुनौती दी। उनका साहस, संगठन क्षमता और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वीरांगना उदा देवी पासी केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की अग्रदूत थीं। उन्होंने दासता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में भी संकोच नहीं किया। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि उनके शौर्य को पाठ्यक्रमों में स्थान दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और बलिदान से परिचित हो सकें।स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने वीरांगना की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि उदा देवी पासी के आदर्शों और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों-नायिकाओं की गाथाएं ही राष्ट्र की असली धरोहर हैं। वीरांगना उदा देवी पासी जैसी विभूतियों का स्मरण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए नई ऊर्जा का संचार है। श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ सतीश पासी विष्णु प्रसाद गणेश पासवान विकास शर्मा उपेंद्र कुमार दयाराम आनंद यादव अधिवक्ता अभिषेक पासी आदित्य पासवान मनीष पासवान इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
