डॉ॰ हंसराज कुशवाहा को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘उत्कर्ष शिक्षक सम्मान’ से किया सम्मानित।
# (इससे पूर्व में भी मिल चुके हैं कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार)।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
सिद्धार्थनगर-
दिनांक 29 जून 2026 दिन सोमवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर के दशम दीक्षान्त समारोह में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ॰ हंसराज कुशवाहा को एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। आप को बताते चले कि आज दिनांक 29 जून 2026 को जनपद के गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य समारोह में विश्वविद्यालय की माननीय कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने रतन सेन डिग्री कॉलेज बांसी सिद्धार्थनगर के डॉ॰ हंसराज कुशवाहा को ‘उत्कर्ष शिक्षक सम्मान’ से नवाजा।
महामहिम राज्यपाल ने मुख्य मंच पर डॉ॰ कुशवाहा को यह सम्मान पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर उनके योगदान की सराहना की। डॉ॰ कुशवाहा को यह सम्मान उनके उत्कृष्ट अकादमिक अवदान, उच्च स्तरीय शोधपरक दृष्टिकोण और शिक्षा जगत में स्थापित किए गए नए कीर्तिमानों के सम्मानार्थ प्रदान किया गया है। इस गरिमामयी दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पर्यावरणविद् प्रोफेसर मधुलिका अग्रवाल उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार की माननीय उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने मंच की गरिमामयी शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों की गरिमामयी मौजूदगी में डॉ॰ हंसराज कुशवाहा को मिला यह सम्मान पूरे सिद्धार्थ नगर जनपद के शिक्षा जगत के लिए एक गौरवशाली क्षण बन गया।

डाॅ. कुशवाहा के देश-विदेश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्र-पत्रिकाओं में 25 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके साथ ही साथ आपने शिक्षा जगत को समृद्ध करते हुए 3 पुस्तकों का सम्पादन व सह-सम्पादन कार्य भी सफलतापूर्वक किया है। शैक्षणिक क्षेत्र में में बेहद सक्रिय डॉ0 हंसराज कुशवाहा ने 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों व कार्यशालाओं में प्रतिभाग कर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।
आपकी सबसे बड़ी अन्तर्राष्ट्रीय उपलब्धियों में पड़ोसी देश नेपाल में स्थित लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी भी शामिल है, जहाँ आपने बौद्ध दर्शन (Buddhist Philosophy) पर अपना उच्च स्तरीय शोध पत्र प्रस्तुत कर वैश्विक पटल पर संस्थान का मान बढ़ाया था।

डॉ0 कुशवाहा को इससे पूर्व भी शिक्षा, शोध और सृजन के लिए विभिन्न मंचों पर भागीरथ पुरस्कार, अन्तर्राष्ट्रीय तथागत विशिष्ट सृजन सम्मान, इनोवेटिव एजुकेशनिस्ट अवार्ड व सर्वोत्तम शोध पत्र प्रस्तुतीकरण अवार्ड जैसे विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजे जा चुके है।
‘उत्कर्ष शिक्षक सम्मान’ के रूप में आपके नाम के आगे एक और स्वर्णिम उपलब्धि जुड़ गई है।
डॉ0 हंसराज कुशवाहा ने शिक्षा को और अधिक प्रभावी व व्यावहारिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय की उच्च स्तरीय समिति ने इस सर्वोच्च सम्मान के लिए उनके नाम का चयन किया।

शिक्षाविदों और सहयोगियों ने दी बधाई। इस गौरवशाली उपलब्धि पर शिक्षा संकाय, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष (Dean) प्रोफेसर विजय कुमार राय, प्रोफेसर उमेश प्रसाद यादव, प्रोफेसर श्रीप्रकाश मिश्र, प्रोफेसर राघवेंद्र सिंह और रतन सेन डिग्री कॉलेज, बाँसी के प्राचार्य डॉ॰ संतोष कुमार सिंह, प्रो. शरीफुद्दीन, प्रो. अर्चना मिश्रा, प्रो. किरन देवी, डॉ. ब्रह्म सिंह, डॉ. अरविन्द कुमार मौर्य, डॉ. देवेंद्र प्रसाद, डॉ. दयाशंकर पटेल, डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय, डॉ. मनोज कुमार सोनकर, डॉ. मनीष कुमार भारती, पुस्तकालयाध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा, यतीन्द्र, सौरभ, मनोज, दिनेश, ममता सहित महाविद्यालय परिवार के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारी बन्धुओं ने डॉ॰ कुशवाहा को हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ दीं।

पूरे महाविद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ0 कुशवाहा की यह उपलब्धि संस्थान के लिए अत्यन्त गौरव और प्रेरणा का विषय है।
