पहली ही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खारिज हुई अभिजीत की अपील।
अधिवक्ता कुलदीप मिश्र का पंजीकरण निरस्त कराने 6 वकीलो के फौज के साथ पहुंचे थे शीर्ष अदालत,नहीं मिली राहत।
संतकबीर नगर।
महान सूफी संत कबीर दास की परिनिर्वाण स्थली मगहर से शुरू हुई अधिवक्ता पंजीकरण कानूनी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की दो सदस्यीय पीठ ने 10 अगस्त 2026 को पहली ही सुनवाई में ही मगहर के तिवारी टोला निवासी शिकायतकर्ता अभिजीत श्रीवास्तव की सिविल अपील निरस्त कर दी 6 वकीलों की फौज खड़ा करने के बाद भी शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं मिला। शिकायतकर्ता मोहनलालपुर मगहर निवासी एडवोकेट कुलदीप मिश्र का अधिवक्ता पंजीकरण रद्द कराने का दांव लेकर देश की शीर्ष अदालत पहुंचे थे। हालांकि अदालत ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया।
मिली जानकारी अनुसार नगर पंचायत मगहर कस्बे के निवासी अधिवक्ता कुलदीप मिश्र ने बताया कि बदले की भावना व ईष्या द्वेष के कारण हैरान परेशान करने के नियत से तिवारी टोला निवासी अभिजीत श्रीवास्तव ने 29 अप्रैल 2024 को यूपी बार कौंसिल में शिकायत दर्ज कराकर उनके पर जन्मतिथि में विसंगति और मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए उनका अधिवक्ता पंजीकरण रद्द करने की मांग किया था इस पर उन्हें मिली नोटिस के जवाब में उन्होंने विस्तृत साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने नामांकन के समय ही हलफनामे के जरिए सभी आवश्यक तथ्य पारदर्शी रूप से उजागर कर दिए थे। यूपी बार कौंसिल में निर्धारित एक वर्ष की कानूनी समयसीमा के भीतर निर्णय न हो पाने के कारण पत्रावली नियमानुसार बार कौंसिल नई दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। वहां अनुशासन समिति ने मेरे अभिलेखों की विधिवत जांच के बाद 29 अप्रैल 2026 को आरोपों को बेबुनियाद पाकर शिकायत खारिज कर दिया था। जिसे शिकायतकर्ता अभिजीत श्रीवास्तव ने 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील दाखिल कर चुनौती दिये थे। 10 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई हुई जिसमें अभिजीत श्रीवास्तव ने 6 वकीलों का फौज खड़ा किया माननीय न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और माननीय न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया अपीलार्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता को सुना। हम भारतीय बार कौंसिल की अनुशासन समिति द्वारा पारित 29 अप्रैल 2026 के आक्षेपित आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है तदनुसार अपील खारिज की जाती है। संत कबीर की परिनिवार्ण स्थली ऐतिहासिक कस्बा नगर पंचायत मगहर से शुरू हुई व्यक्तिगत रंजिश और कानूनी दांव-पेच की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत में अपने मुकाम पर पहुँचकर समाप्त हो गई है।
