गोरखपुर में खौफ का साया: ‘भाजपा नेता हड़प रहे हमारी जमीन, मांग रहे जान की भीख!’
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– दिल दहला देने वाला मामला: दिलेजाकपुर में पड़ोसी विवाद बना खूनी रंजिश, पीड़ित परिवार ने लगाई सुरक्षा की गुहार।
गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सत्ता की हनक और जमीन की भूख ने एक सीधे-साधे परिवार का जीना मुहाल कर दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के दिलेजाकपुर इलाके में जमीन कब्जे को लेकर शुरू हुआ पड़ोसी विवाद अब एक खौफनाक मोड़ ले चुका है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एक रसूखदार भाजपा नेता के शह पर उनकी पुश्तैनी जमीन को जबरन कब्जाया जा रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
दहशत के साए में जीने को मजबूर गुप्ता परिवार –
मकान संख्या 121 के मालिक परमेन्द्र गुप्ता और राजेन्द्र गुप्ता ने पुलिस के आला अधिकारियों की चौखट पर पहुंचकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ितों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उनके मकान के सहन और मुख्य भूमि को लेकर पड़ोसी अशोक कुमार गुप्ता से लंबे समय से विवाद चल रहा है।
लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। आरोप है कि अशोक कुमार गुप्ता के भतीजे, योगेश और देवेश- खुलेआम गुंडागर्दी पर उतारू हैं और उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं।
पीड़ितों का दर्दनाक बयान : –
“अशोक कुमार गुप्ता और उनके लोग हमें आए दिन सरेराह गाली-गलौज करते हैं। जब हम अपनी ही जमीन को बचाने की कोशिश करते हैं, तो हमें सीधे जान से मारने की धमकी दी जाती है। हम अपने ही घर में कैद होने को मजबूर हैं और हर पल मौत के साए में जी रहे हैं।”
क्या सत्ता के दबाव में झुकेगा प्रशासन ?
इस पूरे मामले में भाजपा नेता का नाम सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और सूबे के मुखिया से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि:-
निष्पक्ष जांच:-
बिना किसी राजनीतिक दबाव के पूरे मामले की तुरंत और पारदर्शी जांच की जाए।
कठोर कार्रवाई:-
भू-माफियाओं और धमकी देने वाले रसूखदार आरोपियों पर तत्काल सख्त से सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए।
सुरक्षा की गारंटी: –
पीड़ित परिवार को तुरंत पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि उनके जान-माल की रक्षा हो सके।
अब देखना यह होगा कि सुशासन का दावा करने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस इस ‘पावरफुल’ आरोपी के खिलाफ क्या कदम उठाती है, या फिर एक पीड़ित परिवार यूं ही इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाता रहेगा।
