संतकबीर नगर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा ।
मानदेय बढ़ाने के नाम पर ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा इजाफा, सरकार के खिलाफ आर-पार के मूड में संघ।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीरनगर –
आज दिनांक 18 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का सब्र अब जवाब दे गया है। सरकार द्वारा मानदेय में की गई मामूली बढ़ोतरी से महिलाओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ‘महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ, उ०प्र०’ ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा तेवर दिखाया है और जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर मुख्यमंत्री के सापेक्ष जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन।
उनकी माग है कि मानदेय कम से कम 18,000 रुपये किए जाने की मांग की है।आपको बताते चलें कि
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ शाखा-संतकबीरनगर ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक तीखा ज्ञापन भेजा है।
संघ का कहना है कि सरकार ने हाल ही में शासनादेश जारी कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय मात्र 1,500 रुपये और सहायिकाओं का मात्र 750 रुपये बढ़ाया है। महंगाई के इस दौर में इतनी मामूली रकम बढ़ना इन मेहनतकश महिलाओं के साथ भद्दा मजाक है।
संघ ने तंज कसते हुए कहा है कि जहां एक तरफ विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं जमीनी स्तर पर काम करने वाली इन महिलाओं के हाथ निराशा के अलावा कुछ नहीं लगा है।
मानदेय के अलावा संघ ने पोषण ट्रैकर ऐप को जीपीएस (GPS) से संचालित करने के आदेश पर भी कड़ा एतराज जताया है। संघ का आरोप है कि तकनीकी पेचीदा होने के कारण कार्यकर्ताओं को इसे चलाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मांग की गई है कि पोषण ट्रैकर को बिना जीपीएस के पहले की तरह ही संचालित किया जाए।

संघ की मुख्य मांगें निम्न है –
- कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को संविदा परिषद में रखते हुए न्यूनतम मानदेय 18,000 रुपये किया जाए।
- हालिया मामूली बढ़ोतरी 1500 और 750 रुपये) को खारिज करते हुए ठोस और सम्मानजनक वेतनमान की मांग।
- पोषण ट्रैकर ऐप से जीपीएस की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त किया जाए।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन आक्रोशित महिलाओं की मांगों पर क्या कदम उठाती है, या फिर यह चिंगारी आने वाले दिनों में किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगी।
