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बिशुनपुर गांव में रास्ते की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन ।

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– 12 सौ आबादी वाले गांव में आजादी के बाद नही हुआ विकास कार्य ।

– गांव में नाली, खड़ंजा, पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का नही मिला लाभ ।

धनघटा, संत कबीर नगर। 

धनघटा तहसील क्षेत्र अंतर्गत नाथनगर ब्लाक का 12 सौ आबादी वाले विशुनपुर (कोल्हूगाड़ा) गांव में आजादी के सात दशक बाद भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नही हो सकी। गांव में जाने के लिए ग्रामीणों को पगडंडी के सहारे गुजरना पड़ रहा है। बुधवार को दर्जनों ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि गांव में विकास करने का वादा भूल जाते है। ग्रामीण व पूर्व अपर निदेशक समाज कल्याण पीसी उपाध्याय, मनीराम, परमहंस, नन्द किशोर, झिनकान, साधु गौतम, त्रिभुवन प्रसाद, भजन लाल गौतम, राम नारायण, हरिशचंद्र उपाध्याय, शिवनारायण यादव, इंद्रावती देवी, दीपमाला, लीलावती आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 40% अनुसूचित बस्ती की आबादी है। इसके अलावा पिछड़े व सवर्ण समाज के लोग निवास करते हैं। कहा कि गांव के लोग आज भी दो किलोमीटर लंबी पगडंडी से गुजर कर पिच सड़क तक पहुंचते है। गांव के गली में आज तक खड़ंजा तक नही लग सका। पेयजल, स्वच्छता मिशन, आवासीय सुविधा, बिजली आदि सुविधाएं गांव में नही पहुंच सकी है। बस्ती जिले की सीमा से सटे इस गांव में रास्ता न होने से एक एम्बुलेंस तक नही पहुंच पा रही है। रास्ता न होने से शादी विवाह का रिश्ता भी लोग लेकर नही पहुंचते है। बरसात के दिनों में पगडंडियों पर पैदल चलना भी दुस्वार बना हुआ है। आधुनिक दौर में जहां चारो तरफ पक्की सड़के बनाई जा रही है वही विशुनपुर गांव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2015 में धनघटा के तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य राकेश पाठक के प्रयास से ग्राम पंचायत में एक खड़ंजा लगाया गया था। देखरेख के अभाव में वह खड़ंजा भी अब पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो चुका है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक गांव में विकास कार्य शुरू नही किये जाते तब तक ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

ग्राम प्रधान राम उग्रह ने बताया कि पिछले पंचवर्षीय योजना में पर्याप्त बजट न होने से रास्तो का निर्माण नही हो सका। अन्य सुविधाओं के न पहुंचने के सवाल पर प्रधान गोलमोल जबाब देकर पल्ला झाड़ते नजर आए।

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