सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का भव्य समापन, पार्थिव मंगलोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब।
ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
रिसिया, बहराइच।
रिसिया पंचवटी श्री सीताराम आश्रम, ऋषिभूमि, रिसिया में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा एवं पार्थिव पूजन का बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस पर परमपूज्य पीठाधीश्वर संत श्री रविशंकर जी महाराज “गुरुभाई” ने शिव महापुराण का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि “शिव महापुराण का वास्तविक संदेश शिवभक्ति, सेवा, समर्पण और मानव कल्याण है।”
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में पूज्य महाराज श्री ने कहा कि श्री शिव महापुराण केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, करुणा, संयम, सेवा और आत्मकल्याण की दिशा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। भगवान शिव का जीवन त्याग, सरलता, क्षमा और लोकमंगल की सर्वोच्च प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु निष्काम भाव से भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन के दुःख दूर होते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति तथा भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सात दिनों तक सुनी गई कथा का वास्तविक फल तभी मिलेगा, जब उसके आदर्शों को दैनिक जीवन में उतारा जाएगा। सत्य, सदाचार, सेवा, संयम, करुणा और “ॐ नमः शिवाय” के निरंतर स्मरण को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और सनातन संस्कृति के मूल्यों के प्रसार का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कथा विश्राम के उपरांत पार्थिव मंगलोत्सव वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। भगवान शिव का रुद्राभिषेक, महाआरती एवं पूजन सम्पन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के गगनभेदी जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा।

सात दिवसीय आयोजन में संत-महात्माओं, विद्वान ब्राह्मणों, यजमानों, स्वयंसेवकों, मातृशक्ति एवं हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता उल्लेखनीय रही। आश्रम परिवार ने आयोजन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, प्रशासन एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी के सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की।
कथा के समापन अवसर पर पूज्य रविशंकर जी महाराज “गुरुभाई” ने सभी श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, संस्कार और सद्भाव के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए शिव कृपा से जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया।

