20 साल पुराने खूनी खेल का सनसनीखेज अंत, ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के चक्रव्यूह में फंसा चाकुबाज़, एसपी संदीप कुमार मीना के हंटर से थर्राया मुजरिम!
संतकबीर नगर-
कानून के हाथ लंबे होते हैं और जब पुलिस का एक्शन ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ में बदल जाए, तो मुजरिम पाताल से भी ढूंढ निकाला जाता है! संतकबीर नगर पुलिस ने दो दशक पुराने एक खूनी और रूह कंपा देने वाले मामले में ऐसी अचूक और ताबड़तोड़ पैरवी की कि माननीय न्यायालय ने आरोपी को सीधे सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस कप्तान संदीप कुमार मीना के कड़े तेवरों के आगे आखिरकार गुनहगार ने घुटने टेक ही दिए!
2006 का खूनी खौफ: क्या थी वो खौफनाक वारदात ?
ये कहानी शुरू होती है साल 2006 की एक सर्द रात से। औरही गांव के रहने वाले पप्पू कहार को क्या पता था कि उस पर मौत का जानलेवा हमला होने वाला है। आरोपी सुबाष तिवारी ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए पप्पू कहार पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उसे लहूलुहान कर दिया था। चीख-पुकार, खून से सनी जमीन और इलाके में फैला वो खौफ… जिसे याद कर आज भी लोग कांप उठते हैं। बखिरा और मेंहदावल पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो आरोपी को भागने का रास्ता नहीं मिला। जांबाज सब-इंस्पेक्टर गोकर्ण सिंह ने सबूतों का ऐसा जाल बुना कि आरोपी कोर्ट के कटघरे में आ खड़ा हुआ।
कोर्ट में खुली किस्मत की ‘थर्ड आई’, जज ने सुनाया कड़ा फरमान!
संतकबीरनगर के सीजेएम कोर्ट में जब अभियोजन पक्ष ने पुलिस की अचूक फाइलों को खोला, तो आरोपी के पास जुर्म कुबूल करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। माननीय न्यायालय ने खूनी खेल के इस मुजरिम को चारों तरफ से घेरते हुए कड़ा फैसला सुनाया:
सलाखों के पीछे:- मुजरिम सुबाष तिवारी को 1 महीने के कड़े कारावास की सजा।
जुर्माने की चोट:-
कुल 3,000 रुपये का भारी अर्थदंड (धारा 324 में 2000 रुपये, धारा 504 में 500 रुपये और धारा 506 में 500 रुपये)।
अल्टीमेटम:- अगर एक भी रुपया कम पड़ा या जुर्माना नहीं भरा, तो 15 दिन और जेल की काल कोठरी में सड़ना पड़ेगा!
संतकबीर नगर पुलिस की खुली चेतावनी:-
अपराध चाहे आज का हो या 20 साल पुराना, ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत हर एक अपराधी का हिसाब होगा। अगर कानून से खिलवाड़ किया, तो अंजाम जेल की सलाखें ही होंगी!
