झाड़-झंखाड़ों में गुम हुई त्रिमुहानी घाट पुलिस चौकी।
बदहाली के आंसू रो रही ‘सुरक्षा’ की रक्षक।
रिपोर्ट – दिलशाद अहमद
बहराइच।
जिस पुलिस चौकी को राहगीरों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया था, आज वही चौकी खुद अपनी बदहाली पर आंसू रो रही है। बहराइच-नानपारा नए बाईपास पर स्थित त्रिमुहानी घाट पुलिस चौकी वर्तमान में विभाग की अनदेखी के चलते झाड़-झंखाड़ और जंगली झाड़ियों के बीच पूरी तरह से तब्दील हो चुकी है।देख-रेख के अभाव में चौकी का भवन अब झाड़ियों से पट गया है। आलम यह है कि दूर से देखने पर यह पहचानना मुश्किल है कि यह एक सरकारी पुलिस चौकी है।
स्थापना का उद्देश्य-
इस चौकी की स्थापना तत्कालीन एसपी सुजाता सिंह द्वारा की गई थी ताकि हाईवे पर आने-जाने वाले वाहनों और नागरिकों को 24 घंटे सुरक्षा मिल सके।राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर स्थित होने के कारण यह पॉइंट सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।
समाजसेवियों ने उठाए सवाल –
स्थानीय समाजसेवी सचिन श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन की यह लापरवाही समझ से परे है। उन्होंने बताया जिस चौकी को जनता की सुरक्षा की दरकार पूरी करनी थी, आज वह खुद सुरक्षा और जीर्णोद्धार की बाट जोह रही है। झाड़-झंखाड़ के बीच तब्दील इस चौकी से पुलिसिंग होना तो दूर, यहाँ सांप-बिच्छुओं का डेरा लगने लगा है।वही स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस चौकी को तत्काल प्रभाव से साफ-सुथरा कर यहाँ पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि बाईपास पर सुरक्षा का माहौल फिर से बहाल हो सके।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल-
लाखो की लागत से बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच, एक स्थापित पुलिस चौकी का इस कदर खंडहर में तब्दील होना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों एक महत्वपूर्ण हाईवे चौकी को लावारिस छोड़ दिया गया है? क्या प्रशासन किसी बड़ी वारदात का इंतज़ार कर रहा है।
