भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति महोदय के सापेक्ष जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीर नगर-
दिनांक 10 मार्च 2026 को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) लंबे समय से किसानों, मजदूरों एवं आम जनता के ज्वलंत मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत है।
संगठन द्वारा केंद्र सरकार की किसान-विरोधी नीतियों तथा भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के संभावित दुष्प्रभावों के विरुद्ध लगातार आवाज़ उठाई जा रही है।


इस संबंध में संगठन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं-
1. भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील को निरस्त किया जाए।
यह डील भारत के किसानों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती है। भारत में अधिकांश किसान पारिवारिक खेती पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में खेती बड़े स्तर पर व्यवसाय के रूप में की जाती है। वहां के किसानों को सरकार द्वारा भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। भारत के लगभग 85% किसान 2. 5 एकड़ से कम भूमि के मालिक हैं, जबकि अमेरिका में किसान हजारों एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे भारतीय कृषि व्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। अतः यह फ्री ट्रेड डील तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
3. सभी फसलों पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी का कानून बनाया जाए।
वर्तमान में किसानों की अधिकांश फसलों की खरीद MSP पर नहीं हो पाती, जिसके कारण किसानों को प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि MSP पर खरीद की कानूनी गारंटी का कानून बनाया जाता है, तो किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित एवं न्यायसंगत मूल्य बाप्त हो सकेगा।
4. किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की जाए।
पिछले लगभग 11 वर्षों में सरकार द्वारा बड़े उद्योगपतियों का लगभग 16.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है, जबकि छोटे-छोटे कर्ज के बोझ के कारण देश में अब तक लगभग 4 से 5 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। कर्ज माफी का लाभ मुख्यतः बड़े पूंजीपतियों को मिला है, जबकि किसान लगातार आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं। अतः किसानों के समस्त कृषि ऋण को माफ किया जाए।
5. बीज बिल एवं बिजली बिल को वापस लिया जाए।
इन विधेयकों से बड़ी बीज कंपनियों का एकाधिकार स्थापित होने की आशंका है, जिससे किसान महंगे बीजों पर निर्भर हो जाएंगे ओर बाजार पूरी तरह पूंजीपतियों के नियंत्रण में चला जाएगा। इससे किसानों एवं आम उपभोक्ताओं दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अतः इन बिलों को रद्द किया जाना आवश्यक है।
6. किसानों, मजदूरों एवं आम जनता के लिए मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
वर्तमान में राजनेताओं एवं सरकारी अधिकारियों को सरकार के खर्च पर मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, जबकि उन्हें उच्च वेतन एवं पेंशन भी प्राप्त होती है। विश्व के कई देशों में आम नागरिकों को भी मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। अतः भारत में भी किसानों, मजदूरों एवं आम जनता के लिए मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएं।
इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर संगठन द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम घोषित किए गए हैं-दिनांक 27 फरवरी 2026 को भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील एवं किसान विरोधी नीतियों के विरोध में अमेरिकी राष्ट्रपति एवं भारत के प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया जा चुका है।
दिनांक 10 मार्च 2026 को देश के सभी प्रांतों के प्रत्येक जिले की तहसीलों पर व्यापक स्तर पर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा, जिसके माध्यम से किसान अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
दिनांक 23 मार्च 2026 को हरियाणा राज्य के जिला कुरुक्षेत्र के पीपली में एक विशाल किसान महापंचायत पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेश एवं देशभर से किसान, मजदूर एवं विभिन्न सामाजिक संगठन भाग लेंगे।
ज्ञापन देते समय उमेश भट्ट जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन चढूनी संत कबीर नगर, केसरी प्रसाद गुड़िया समय रामप्रसाद उमा चंद्र महाबली हफीजुल्लाह रामचंद्र यादव राम हरि आज की संख्या में दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
