रक्तदान शिविर में 25 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान, निःशुल्क जांच व दवा वितरण
रक्तवीर युवा क्लब व निफा गोरखपुर द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में 25 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान व साथ मे हुआ निःशुल्क जांच व दवा वितरण !
गोरखपुर –
रक्तवीर युवा क्लब व निफा द्वारा थैलेसीमिया,हीमोफीलिया व कैसंर मरीजों के लिए एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर माँ वैष्णवी लॉन संगम चौराहा पादरी बाजार, में संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और 25 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता की सेवा में योगदान दिया। हालांकि, कई अन्य लोग कम हीमोग्लोबिन और कम वजन के कारण रक्तदान करने से वंचित रह गए।
इस अवसर पर रक्तदान के महत्व को रेखांकित करते हुए, रक्तवीर शिवांबुज पटेल, जो गोरखपुर में सीआईडी में कार्यरत हैं, ने कहा,थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रोग है इसमे ब्लड शरीर मे नही बनता है ऐसे मरीजों को हर माह 2 से 3यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ती है जो परिवार से करा पाना सम्भव नही है ऐसे में हम सबका कर्तव्य बनता है ऐसे मरीजों के लिए रक्तदान करे वही माँ वैष्णवी लॉन के प्रोपोराइटर विवेक कुमार ने बताया एक यूनिट रक्तदान से हम तीन लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं रक्तदान आज के युग मे सबसे बड़ा दान है और ऐसे पुनीत कार्य हेतु मैं अपने मैरेज हाल को निःशुल्क बुकिंग दे देता हूं। रक्तवीर युवा क्लब से रविन्द्र सिंह जी ने बताया यह सेवा कार्य न केवल जरूरतमंदों की मदद करता है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी फैलाता है।” इंडियन बैंक के मैनेजर आमोद मिश्रा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह शिविर न केवल रक्त की आवश्यकता को पूरा करने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रभावी माध्यम बना है।”

इस कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रजापति जी द्वारा निःशुल्क कांस्य थेरेपी किया गया
डॉ रमेश पटेल होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी द्वारा निःशुल्क जांच व दवा दिया गया
रक्तदान शिविर के दौरान रक्तदाताओं को मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में बलराम सैनी, ध्यान चंद रौनियार, dr. त्रयम्बक पांडे, डॉ. रमेश पटेल, राहुल दुबे, स्निग्धा ,रोहित,अरविंद यादव,मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ-साथ स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस आयोजन का उद्देश्य रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में एक सकारात्मक संदेश देना था। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे शिविरों के आयोजन की प्रतिबद्धता जताई।
