संत कबीर साहित्यिक सामाजिक कला संस्थान की 52वीं मासिक कवि गोष्ठी संपन्न, कवियों ने बिखेरे रचनाओं के रंग।
संत कबीर नगर- मगहर।
संत कबीर साहित्यिक सामाजिक कला संस्थान द्वारा 52वीं मासिक कवि गोष्ठी का परिवर्तन क्लासेज में आयोजन किया गया।जिसके मुख्य अतिथि राधे श्याम मिश्रा और डा बहार गोरखपुरी ने अध्यक्षता की।कवि गोष्ठी का सफल संचालन शाहरुख सागर ने किया।
कवि गोष्ठी का शुभारंभ नाते पाक और सरस्वती वंदना से किया गया। उसके बाद अभय प्रकाश आर्य ने “तुम मेरी वफाओं को सौगात में ले जाओ,कभी काम ये आयेंगी इन्हे साथ ले जाओ”रचना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अबरार मगहरी ने “जैसे थे हम वैसा दिखाया उसने,सच दिखाया तो आईना बुरा लगता है” पढ़ कर माहौल को बनाया।इसी क्रम में डा अफजल हुसैन ने “गांव का माहौल अच्छा सादगी अच्छी लगी,हर बशर अच्छा लगा हर गली अच्छी लगी”को पढ़ ग्रामीण परिवेश को उकेरे का प्रयास किया। गोष्ठी में पंकज वर्मा ने “मुस्कुरा के जाने वाले दिल दुखाते हैं,जो हमसे रूठ जाते हैं वहीं बस याद आते हैं”पढ़ कार्यक्रम को रोमांचक बना दिया। शाहरुख सागर ने “जो मुश्किल लगता है वही तुमको आसान होता है, हौसलों का तेरे अंदर तूफान होता है”। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राधे श्याम मिश्रा ने दोस्ती पर रचना “जख्म दिल का भरा नहीं होता,आप सा गर सखा नहीं होता” को पढ़ा। कवि गोष्ठी मेंडा बहार गोरखपुरी,ओम प्रकाश गौतम,पंकज वर्मा,आफताब मगहरी, सुम्बुल हाशमी,एम अली,सानू सम्राट,शाहेमान अली आदि लोग मौजूद रहे।गोष्ठी के आयोजक शाहरुख सागर ने सभी अतिथियों,कवियों और शायरों के प्रति आभार व्यक्त किया।

