पीस कमेटी की बैठक में पत्रकारों को न बुलाए जाने पर गहराया असंतोष, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ।
संतकबीर नगर- मगहर।
शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मगहर पुलिस द्वारा बुलाई गई पीस कमेटी की बैठक में पत्रकारों को आमंत्रित नहीं किए जाने से पत्रकारों में असंतोष है। कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों पर बैठक में मीडिया को दूर रखने पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर प्रश्न चिन्ह लगा है।आखिर वह कौन-सी वजह के चलते पत्रकारों को इस बैठक में शामिल करना जरूरी नहीं समझा गया?
पीस कमेटी की बैठक का मकसद ही विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद कायम करना और संभावित विवादों को बातचीत के जरिए टालना होता है।ब्यूरो प्रभारी कौस्तुभ एक्सप्रेस शिवानंद वर्मा ने कहा कि पुलिस आमतौर पर ऐसी बैठकों में जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं,व्यापारियों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और संभ्रांत नागरिकों को आमंत्रित करती है। वहीं स्थानीय पत्रकार पुलिस और जनता के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।इसके बावजूद पत्रकारों को बैठक से बाहर रखने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। पत्रकारों का काम पुलिस की बैठकों में किसी पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि वहां लिए गए निर्णयों, पुलिस की अपील और जनहित से जुड़े संदेश को समाज तक पहुंचाना है।ऐसे में मीडिया को ही बैठक से दूर रखने की वजह को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।कस्बे के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार हाजी अफजल खां ने कहा कि यदि पीस कमेटी की बैठक पूरी तरह शांति, सद्भाव और कानून-व्यवस्था को लेकर है। तो पत्रकारों को बुलाने से ऐसी कौन-सी स्थिति पैदा हो सकती थी जिससे बैठक की शांति प्रभावित होती?यदि पुलिस प्रशासन के पास पत्रकारों को बैठक से दूर रखने का कोई प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी कारण था, तो उसे स्पष्ट किया जाना भी जरूरी है। अन्यथा यह फैसला पुलिस और मीडिया के बीच संवाद की दूरी बढ़ाने वाला माना जा सकता है।
जीपीए के जिला कोषाध्यक्ष सत्य प्रकाश वर्मा ने कहा कि त्योहारों और संवेदनशील मौकों पर अफवाहें कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे समय में पुलिस की अपील और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पीस कमेटी की बैठक में पत्रकारों की मौजूदगी से पुलिस के संदेश को तथ्यात्मक रूप से जनता तक पहुंचाया जा सकता है।मीडिया को बैठक से अलग रखने के बजाय पुलिस और पत्रकारों के बीच समन्वय कायम करना शांति व्यवस्था के लिहाज से संवाद का एक माध्यम हो सकता है। ऐसे में मगहर पुलिस द्वारा पत्रकारों को बैठक में नहीं बुलाए जाने के फैसले ने स्थानीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है।
