दुसाध/ढाढ़ी जाति प्रमाण-पत्र के आवेदन निरस्त होने पर अखिल भारतीय दुसाध कल्याण परिषद ने उठाई आवाज।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीरनगर-
आज दिनांक 24 अगस्त 2026 को अखिल भारतीय दुसाध कल्याण परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा जनपद संतकबीरनगर में अनुसूचित जाति के दुसाध/ढाढ़ी जाति प्रमाण-पत्रों के आवेदन निरस्त किए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
आपको बताते चलें कि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष लाल चन्द्र दुसाध ने जिलाधिकारी महोदय को एक ज्ञापन सौंपकर विधिसम्मत स्थिति स्पष्ट करने और भूमिहीन व्यक्तियों के लिए वैकल्पिक प्रमाण प्रस्तुत करने की व्यवस्था निर्धारित करने की मांग किया है।
लाल चंद दुसाध का कहना है कि पूर्व में इसी समुदाय के कई व्यक्तियों की जांच के उपरांत उन्हें दुसाध जाति मानते हुए प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि वर्तमान में इसी समुदाय के अन्य पात्र व्यक्तियों के आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।
यदि तहसील प्रशासन के अनुसार आवेदक अनुसूचित जाति दुसाध नहीं है और ढाढ़ी उपजाति को भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है, तो प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार संबंधित व्यक्ति को किस जाति का माना जाता है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
आवेदन निरस्त करने की स्थिति में आवेदक को लिखित रूप से यह बताया जाना चाहिए कि प्रशासन उसे किस जाति का मानता है और उसे किस आधार पर प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अधिकार है या नहीं।
यदि जाति प्रमाण-पत्र के परीक्षण में 1356 फसली एवं 1359 फसली के राजस्व अभिलेखों को आधार माना जा रहा है, तो ऐसे भूमिहीन परिवारों के संबंध में भी स्पष्ट व्यवस्था की जानी चाहिए जिनके पूर्वजों के नाम उक्त राजस्व अभिलेखों में भूमि दर्ज नहीं है।
