बहराइच के सोहनी बलई गांव में गूंजा भारत-नेपाल मैत्री का सांस्कृतिक स्वर।
बहराइच के सोहनी बलई गांव में गूंजा भारत-नेपाल मैत्री का सांस्कृतिक स्वर।
रंग, रस और रिश्तों से सजी अविस्मरणीय संध्या।
रिपोर्ट – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
बहराइच 24 फरवरी।
भीमराव अंबेडकर पार्क, (सोहनी बलई गांव), बहराइच का प्रांगण मंगलवार को भारत-नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बना, जब संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 के अंतर्गत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्साह एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ शोभायात्रा के साथ हुआ। तत्पश्चात दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के संबोधन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला प्रारंभ हुई।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी अतुल द्विवेदी जी की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उनके निर्देशन में समस्त व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रहीं। कार्यक्रम में माननीय विधायक प्रतिनिधि बलहा आलोक जिन्दल, ब्लॉक प्रमुख (मिहीपुरवा) अभिषेक वर्मा उर्फ सौरव, विभाग सम्पर्क प्रमुख, बहराइच धर्मेन्द्र सिंह, एसएसबी कैप्टन तिलक राज एवं एसएसबी जवानों की की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए ब्लॉक प्रमुख अभिषेक वर्मा ने भारत-नेपाल के ऐतिहासिक एवं पारिवारिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना रोटी-बेटी का संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक पारिवारिक रिश्ते नेपाल से जुड़े हैं और दोनों देशों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे में घुली-मिली हैं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से वह सांस्कृतिक धरोहर पुनः जीवंत हो उठी है, जिसे आधुनिकता की दौड़ में हम कहीं पीछे छोड़ते जा रहे थे।

मल्लखंभ सहित विभिन्न प्रस्तुतियों में बच्चों और कलाकारों की प्रतिभा उल्लेखनीय रही। श्री वर्मा ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध सदैव सौहार्दपूर्ण रहे हैं और आगे भी निरंतर सुदृढ़ होते रहेंगे। हम एक-दूसरे की संस्कृति को साझा करते हुए इस मैत्री को और मजबूत बनाएंगे। अंत में उन्होंने आयोजन हेतु आमंत्रित किए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने “जय हिंद, जय भारत” के उद्घोष के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया।

सांस्कृतिक संध्या की बात की जाय तो लोक से शास्त्र तक हर रंग में सांस्कृतिक एकता की झलक देखने को मिली। अनीता मिश्रा एवं अपर्णा तिवारी के लोक गायन ने कार्यक्रम को भक्तिमय बनाया। रवि प्रकाश ने मल्लखंभ लोक विधा की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। शिवराम यादव के बिरहा गायन ने लोक परंपरा की सजीव झलक प्रस्तुत की। राजकुमारी एवं दल द्वारा प्रस्तुत थारू लोक नृत्य ने सीमावर्ती संस्कृति की सुंदर छटा बिखेरी। जसवीर सिंह के सूफी गायन ने आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। समापन में पंकज कुमार के एकल कत्थक नृत्य ने दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। जबकि छात्र-छात्राओं द्वारा ‘सोशल मीडिया’ विषय पर आधारित एक प्रभावशाली नाटक की प्रस्तुति दी गई।
महोत्सव जन-उत्सव की झलक देने में पूरी तरह से सफल रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। “एक जनपद एक उत्पाद” प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक झांकियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं। विभाग की ओर से आयोजन को सफल बनाने में सूरज गौतम, वैभव विशाल, लकी सोनकर एवं सुशील सहित समस्त कर्मचारीगण का विशेष योगदान रहा। भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव और सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त संदेश देने में सफल रहा। महोत्सव ने यह सिद्ध किया कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंध केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गहरी आत्मीयता और साझा विरासत का प्रतीक हैं। बहराइच की धरती से यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रसारित हुआ कि “संस्कृति ही वह सेतु है, जो दो देशों को दिल से जोड़ती है।
