पराली प्रबंधन और जीरो टिलेज विधि अपनाने पर जोर, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किया जागरूक !
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को बताईं आधुनिक कृषि तकनीकें !
ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
बहराइच !
खेत बचाओ अभियान के तहत सोमवार को आईटीसी मिशन सुनहरा कल एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जनपद के हुजूरपुर, पयागपुर, महसी और कैसरगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत नींबुई कला, खुटेहना, किशुनपुर मीठा, हरदी गौरा और इच्छापुर में किसान जागरूकता गोष्ठियों का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी देकर टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
गोष्ठी में अधिकारियों ने किसानों को पराली प्रबंधन, जीरो टिलेज (शून्य जुताई) विधि से गेहूं की बुवाई, बीज उपचार, मृदा उपचार और फसलों में बेसल डोज के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसान पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें।
अधिकारियों ने बताया कि जीरो टिलेज जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
इस दौरान गोष्ठी की गतिविधियों और किसानों की सहभागिता का जायजा लिया गया। साथ ही कार्यक्रम की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुझाव भी साझा किए गए। अधिकारियों ने खेत बचाओ अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों तक टिकाऊ और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जागरूक कर कृषि भूमि का संरक्षण करना, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
खेत बचेंगे, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। पराली का उचित प्रबंधन होगा, तभी खेती लाभकारी बनेगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
