लोजपा (रा) के जिलाध्यक्ष लालचंद दुसाध ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र।
# दुसाध जाति के साथ ‘ढाढ़ी’ उपजाति को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की मांग।
ब्यूरो रिपोर्ट-के0पी0 मौर्य
संतकबीर नगर:-
आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को लोक जनशक्ति पार्टी (रामिलास) के पूर्वी उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिलाध्यक्ष लालचंद दुसाध ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सापेक्ष जिलाधिकारी को एक लिखित पत्र प्रेषित किया है।
इस पत्र के माध्यम से उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में निवास करने वाले अनुसूचित जाति के दुसाध समुदाय (जिन्हें बोलचाल की भाषा में ‘ढाढ़ी’ भी कहा जाता है) को लेकर एक अहम मांग उठाई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि अनुसूचित जाति-जनजाति आदेश 1956 में एमेंड एक्ट के तहत सभी प्रदेशों में दुसाध धारी, धरही को आदेश 1950 पेज 5 लिस्ट में स्पष्ट आदेशित भारत सरकार द्वारा किया गया है।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 1956 के तहत आने वाले अनुसूचित जाति ‘दुसाध, ढाढ़ी’ को जातियों की सूची में एक साथ सूची बद्ध नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों की सूची में क्रमांक 33 पर केवल ‘दुसाध’ को अधिसूचित किया गया है।
निदेशक अनुसूचित जाति एवं जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा वर्ष 2001-2002 में नियम 301 के अंतर्गत कराए गए सर्वेक्षण में दुसाध जाति की सात उपजातियों का होना बताया गया है, जिसमें ‘ढाढ़ी’ भी सम्मिलित है, परंतु इसे संवैधानिक व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया है।
बिहार और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर मांग की गई है कि बिहार और पश्चिम बंगाल प्रदेश की भांति 1956 के तहत दुसाध के साथ ‘ढाढ़ी’ को भी भारत सरकार के शासनादेश के तहत उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित कराया जाए, जिससे समाज को न्याय मिल सके।
इस पत्र की प्रति के साथ 1956 एमेंड एक्ट का आदेश, भारत सरकार राज्य पत्र असाधारण आदेश 1976, जिलाधिकारी संतकबीरनगर के पत्र और जनपद स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के आदेश का हवाला भी संलग्न किया गया है।
