खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को बताईं आधुनिक कृषि तकनीकें !
पराली प्रबंधन और जीरो टिलेज विधि अपनाने के लिए किया प्रेरित, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर दिया जोर !
ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
रिसिया/बहराइच।
आईटीसी मिशन सुनहरा कल एवं ग्रामीण डेवलपमेंट सर्विसेज (जीडीएस) के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को खेत बचाओ अभियान के तहत शिवपुर और महसी ब्लॉक की ग्राम पंचायत किशुनपुर मीठा व हरदी गौरा में किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में जीडीएस मुख्यालय लखनऊ से पहुंचीं परियोजना निदेशक आशिमा चेतन, निदेशक अमिताभ मिश्रा, परियोजना लेखाकार आरके पैनिकर एवं परियोजना समन्वयक नरेंद्र देव पाण्डेय ने गोष्ठी की गतिविधियों का जायजा लिया। अधिकारियों ने किसानों को पराली प्रबंधन, जीरो टिलेज (शून्य जुताई) विधि से गेहूं की बुवाई, बीज उपचार, मृदा उपचार और फसलों में बेसल डोज के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

अधिकारियों ने कहा कि फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में किसान पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें। जीरो टिलेज जैसी आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने से खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता भी बनाए रखी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ एवं जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ना है, जिससे कृषि भूमि का संरक्षण हो और किसानों को खेती में बेहतर लाभ मिल सके। इस दौरान किसानों की सहभागिता और गोष्ठी की गुणवत्ता का भी आकलन किया गया। अधिकारियों ने अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि खेतों की मिट्टी की उर्वरता बचाने के लिए पराली का उचित प्रबंधन करें और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। खेत सुरक्षित रहेंगे, तभी खेती लाभकारी बनेगी और पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा।
