पर्यटन विकास द्वारा संत कबीर नगर जिले का होगा कायाकल्प।
खलीलाबाद ब्लॉक के तामा और कोपिया ग्राम चिन्हित।
जनपद में पर्यटन विकास की सम्भावनाओं के दृष्टिगत प्रदेश सरकार का मिल रहा है पूरा सहयोग।
संत कबीर नगर ।
जनपद संत कबीर नगर में पर्यटन विकास की सम्भावनाओं को देखते हुए जनपद के विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों के सौन्दर्यीकरण एवं पर्यटन के दृष्टि से उन्नत एवं समृद्धि बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है।
पर्यटन अधिकारी ने बताया कि जनपद के पर्यटन विकास की कड़ी में संत कबीर नगर ज़िले में, दो गाँवों-कोपिया और तामा को ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए चिह्नित किया गया है। ग्रामीण पर्यटन पहलों में ग्रामीण परिवेश में पर्यटकों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है, साथ ही उन्हें रहने और खाने की सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं। जिन गाँवों की पहचान उनके हथकरघा, हस्तशिल्प और इसी तरह की अन्य कलाओं में उनकी विशेषज्ञता के लिए है, उन्हें उत्पादकों को सहायता देने, पारंपरिक कौशलों को संरक्षित करने और पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया जाता है।
कोपिया गाँव का पुरातात्विक महत्व है; यहाँ प्राचीन काँच निर्माण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। ये निष्कर्ष लगभग 656-134 ईसा पूर्व से 153-96 ईस्वी (कैलिब्रेटेड) के काल के हैं, और पास के ही एक अन्य स्थान पर, ये साक्ष्य 2100-90 ईसा पूर्व (अनकैलिब्रेटेड) तक पुराने पाए गए हैं। तामा गाँव में भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जहाँ वर्ष भर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। किंवदंतियों के अनुसार, यह वह पवित्र स्थल है जहाँ पांडवों की माता, माँ कुंती ने कभी पूजा-अर्चना की थी। यह भी माना जाता है कि गौतम बुद्ध का मुंडन संस्कार (सिर मुंडवाने की रस्म) भी इसी स्थान पर संपन्न हुआ था।
इस स्थल के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस क्षेत्र को एक ‘‘आध्यात्मिक गलियारे’’ (Spiritual Corridor) के रूप में विकसित करने के लिए एक वृहद पर्यटन विकास पहल की घोषणा की है। जिसके क्रम मे पर्यटन विभाग की राज्य सेक्टर अंतर्गत रुपया 2041.49 लाख की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, इन दोनों गाँवों के स्थानीय निवासियों के बीच कौशल विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है; इसके लिए विभाग द्वारा हस्तशिल्प-आधारित विभिन्न पहलुओ की शुरुआत की गई है। वर्तमान में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, और होमस्टे (Homestay) सुविधाओं के लिए कुछ विशिष्ट स्थलों की पहचान भी कर ली गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य भविष्य में पर्यटकों को एक समग्र और गहन पर्यटन अनुभव प्रदान करना है।
‘‘पर्यटन नीति-2022’’ में उभरते हुए रुझानों और विभिन्न हितधारकों जिनमें पर्यटन एवं आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र के संगठन भी शामिल हैं से प्राप्त सुझावों को समाहित किया गया है। इस अद्यतन नीति का मुख्य ज़ोर ‘‘ज़िला संवर्धन परिषद’’ (District Promotion Council) और ‘‘नीति कार्यान्वयन समिति’’ के माध्यम से नीति के क्रियान्वयन को सरल बनाने पर है; साथ ही, राजस्व, नगर विकास, आवास और स्थानीय स्वशासन जैसे विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना और उत्तर प्रदेश के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को प्रमुख पर्यटन स्थलों (Focus Tourist Destination) के रूप में नामित करना भी इस नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं।
संत कबीर नगर ज़िले में ‘‘पर्यटन नीति-2022’’ के अंतर्गत अब तक लगभग 22 नई पर्यटन इकाइयों (जैसे-होटल, बजट होटल, कन्वेंशन सेंटर, मार्गस्थ सुविधा केंद्र आदि) का पंजीकरण किया जा चुका है। इन इकाइयों में कुल मिलाकर लगभग रूपया 58495.00 लाख रुपये का निवेश किया जाना प्रस्तावित है।
पर्यटन विभाग स्थानीय संस्कृति और कलाओं को उजागर करने और उनका उत्सव मनाने के लिए लगभग हर ज़िले में महोत्सव जैसे कार्यक्रम सक्रिय रूप से आयोजित कर रहा है। ये पहलें पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करने में मदद करती हैं, साथ ही उन लोगों को आजीविका भी प्रदान करती हैं जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और बनाए रखते हैं।
मगहर महोत्सव (28 जनवरी – 3 फरवरी) और द्वाबा महोत्सव (नवंबर) को हर साल पर्यटन विभाग द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
पर्यटन विभाग राज्य सेक्टर की योजनाओं के माध्यम से प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास को प्राथमिकता देता है। वर्ष 2017 से लेकर अब तक, पर्यटन विभाग ने संत कबीर नगर जनपद के 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए रुपये 3175.68 लाख स्वीकृत किए हैं। वर्तमान मे कुल 26 परियोजनाए पूर्ण की जा चुकी है, शेष 08 प्रगतिशील है। इस योजना अंतर्गत जनपद के विभिन्न धार्मिक/प्राकृतिक/सांस्कृतिक धरोहरों मे आने वाले पर्यटकों हेतु अवस्थापना सुविधाओ का विकास किया गया है।
