पुलिस विभाग के अधिकारियों की गैर जिम्मेदराना हरकत के लिए सपा कार्यकर्ताओं ने DM को सौंपा ज्ञापन।
मेंहदावल थानाध्यक्ष द्वारा तहरीर बदलने का पीड़ित पर बनाया गया दबाव।
लूट की घटना को मारपीट की घटना दिखाओ तो दर्ज होगा मुकदमा , ये कहना है थाना मेंहदावल पुलिस का ।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीर नगर –
उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के मेहदावल थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जमीन की रजिस्ट्री कराकर लौट रहे एक विद्यालय प्रबंधक और उनके साथियों के साथ जानलेवा हमला और लूट की वारदात हुई।

इसी संदर्भ में संत कबीर नगर जिले के समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस विभाग के भ्रष्ट कार्य प्रणाली को लेकर आज जिलाधिकारी कार्यालय पर जिलाधिकारी को ज्ञापन देते हुए पुलिस विभाग के द्वारा अपराधियों को संरक्षण देने को लेकर जमकर नारेबाजी किया गया।
आपको बताते चले की पीड़ित सुरेश चंद यादव पुत्र रामनाथ यादव निवासी ग्राम टोटहा पोस्ट मुसहरा थाना धर्मसिंहवा तहसील मेहदावल संत कबीर नगर के अनुसार, 15 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे विसौवा चौराहे के पास तीन बदमाशों ने उन पर और उनके भाइयों उमेश यादव व अशोक यादव पर हमला कर दिया।

आरोप है कि हमलावरों ने लोहे के औजार और पंच से वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे दोनों को सिर और कान में गहरी चोटें आईं और उनकी हालत बिगड़ गई।
पीड़ित का कहना है कि हमलावर ₹85,000 नकद भी लूट कर फरार हो गए। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों की मदद से दो आरोपियों को पकड़कर विसौवा पुलिस के हवाले कर दिया गया।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद मेहदावल थाना पुलिस ने अब तक लूट का मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
पीड़ित का आरोप है कि मेहदावल पुलिस केवल मारपीट का केस दर्ज करने का दबाव बना रही है और तहरीर में लुट की घटना को मारपीट की घटना में बदलने को कह रही है।

इसके पहले भी 30 मार्च 2026 को मेहदावल तहसील अंतर्गत इस सड़क पर एक बैंक कर्मचारियों के साथ भी मारपीट और लूट की घटना हुई जिसमें बैंक कर्मचारी का रुपए और मोबाइल दोनों छीन लिया गया लेकिन अभी तक इस पर भी पुलिस प्रशासन के द्वारा कोई उचित कार्रवाई नहीं किया गया।
इससे नाराज होकर समाजवादी पार्टी के नेता सुनील सिंह गौतम ने मामले में हस्तक्षेप किया और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह से मोबाईल के माध्यम बात की। लेकिन बातचीत के दौरान कथित तौर पर कहासुनी हो गई, जिससे मामला और गरमा गया।

इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।
अब सवाल यह उठता है कि जब पीड़ित लूट और जानलेवा हमले का आरोप लगा रहा है, और वही पुलिस प्रशासन लूट की घटना को मारपीट की घटना क्यों दर्शना चाहती है आखिर पुलिस इस मामले में देरी क्यों कर रही है ,अब सवाल यह उठता है कि क्या संत कबीर नगर की पुलिस ऐसे गैंग बनाकर घटना को अंजाम देने वाले लोगों को संरक्षण दे रही है क्या ?
क्या सही धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी — यह देखना अब बाकी है।

