संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर पर श्रद्धा के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व, 11 शिष्यों ने ली गुरु दीक्षा।
संत कबीर नगर- मगहर।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।इस पर्व पर व्यक्ति अपने गुरूजनों की पूजा करते हैं।इसी क्रम में गुरू पूर्णिमा के मौके पर संत कबीर की महापरिनिर्वाण स्थली पर बुधवार को गुरू पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया।जिसकी शुरुआत गुरू पूजा व बीजक पाठ से हुआ।भक्तों ने सदगुरू से प्रभावित होकर ग्यारह लोगों ने गुरु दीक्षा ली। इस अवसर पर भण्डारे में एक पंगत में बैठकर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
गुरू पूर्णिमा के मौके पर आये श्रद्धालुऑं को सम्बोधित करते हुए महंत विचार दास ने कहा कि मानव जीवन का सबसे बड़ा गुरू माता पिता होते हैं।उसके बाद अन्य गुरू को माना जाता है।गुरू ही ईश्वर तक पहुंचने के लिए रास्ता दिखाता है।जिसने भी गुरू के बताए मार्ग का अनुसरण किया वह कभी असफल नहीं हुआ है।उन्होनें कहा कि अच्छे गुरू हमेशा अपने शिष्यों के सफलता की राह दिखाने का कार्य करते हैं।समाज से लेकर परिवार तक शिष्यों में संस्कार देखना चाहता है।गुरू के बिना इंसान के तरक्की की कल्पना नही की जा सकती है। यह एक श्रेणी जैसा है। उन्होने ने कहा कि डाक्टर, इंजीनियर सहित अन्य पदो को पाने में गुरू का महत्वपूर्ण योगदान व सहयोग होता है।इस अवसर पर आये श्रद्धालुओं और भक्तों जनों ने बीजक पाठ, हवन और गुरु आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस मौके पर बिहार,गुजरात,मध्यप्रदेश,छतीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से भारी संख्या में भक्त जन गुरू पूर्णिमा पर्व में शामिल होने आये थे।इस दौरान संत केशव दास,अरविंद दास शास्त्री,रामलखन दास उर्फ लाल बाबा,शान्ति दास पुजारी,कल्पनाथ दास,राम सरन दास,आदि लोग मौजूद रहे।

