गायत्री विद्यापीठ शिशु मंदिर में हर्षोल्लास के साथ बच्चों ने हिंदी दिवस मनाया ।
ग्लोबल स्कूल ऑफ लर्निंग में भी कहानी लेखन, डूडल चित्रकला व संगोष्ठी का आयोजन ।
हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ विद्यालय परिवार ।
ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
रिसिया, बहराइच ।
हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को रिसिया क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। गायत्री विद्यापीठ शिशु मंदिर में हिंदी दिवस बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व, उसके गौरवपूर्ण इतिहास और दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग के प्रति जागरूक किया गया। विद्यालय के प्रबंधक प्रियंका जायसवाल एवं मोनू जायसवाल ने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के सम्मान और उसके अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति उत्साह और गौरव की भावना देखने को मिली।
वहीं ग्लोबल स्कूल ऑफ लर्निंग, रिसिया में विद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से कहानी लेखन, डूडल चित्रकला एवं हिंदी दिवस संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वसीम शेरवानी ने दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. अनुपमा झा, उप प्रधानाचार्या सुहेला अनवर, शिक्षकगण, निर्णायकगण एवं विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने ‘डिजिटल युग में हिंदी : सोशल मीडिया से साहित्य तक’, ‘हिंदी भाषा और रोजगार : वर्तमान संभावनाएं एवं चुनौतियां’, ‘हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श : बदलती संवेदनाएं’ तथा ‘हिंदी भाषा में क्षेत्रीय बोलियों का योगदान’ जैसे विषयों पर सार्थक एवं प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए।
निर्णायकगण ने प्रतिभागियों की विषय की समझ, भाषा की शुद्धता, प्रस्तुति कौशल, आत्मविश्वास एवं प्रश्नोत्तर क्षमता के आधार पर मूल्यांकन किया। साथ ही विद्यार्थियों को उपयोगी सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी भाषा है। हिंदी का सम्मान और प्रयोग केवल हिंदी दिवस तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, निर्णायकगण, शिक्षकगण एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। समारोह का समापन ‘जय हिंद, जय हिंदी’ के उद्घोष के साथ हुआ।
इस अवसर पर भारतेन्दु झा, फौजिया खान, शाहीन रुखसाना, द्विजेन्द्र शाण्डिल्य, शरदेन्दु कुमार श्रीवास्तव सहित शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
