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शिवबंकी एफपीओ का सफल मॉडल देखने पहुंचे 12 राज्यों के प्रतिनिधि !

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आईपीएम तकनीक और ‘शाक सब्जी-हर घर के लिए’ पहल की सराहना, किसानों ने साझा किए अनुभव!

ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद

आज का भारत लाइव

बाराबंकी।

बैंकर्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (बीआईआरडी), नाबार्ड की ओर से आयोजित ‘जलवायु अनुकूल कृषि एवं आजीविका’ कार्यक्रम के तहत संदौली उमरपुर, सफेदाबाद स्थित शिवबंकी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) में एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित की गई। इसमें देश के 12 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग कर एफपीओ के सफल व्यावसायिक मॉडल, कृषि गतिविधियों और किसान हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

सात से 11 सितंबर तक चल रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत आयोजित एक्सपोजर विजिट का नेतृत्व बीआईआरडी की उप महाप्रबंधक डॉ. स्नेहल एम. बंसोड़ और रजनी पांडेय ने किया। प्रतिभागियों को एफपीओ की कार्यप्रणाली, किसान हितैषी योजनाओं, कृषि निवेश और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

आईपीएम से कम होगी खेती की लागत –

एफपीओ निदेशक अतुल कुमार ने कृषि निवेश और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईपीएम को अपनाकर किसान अनावश्यक कृषि लागत को कम कर सकते हैं और फसल उत्पादन को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। विशेषज्ञ शरद शर्मा ने आईपीएम उत्पादों के उपयोग और उनके लाभों के बारे में जानकारी साझा की।

 

‘शाक सब्जी-हर घर के लिए’ पहल बनी आकर्षण –

निदेशक राजकुमार ने एफपीओ की विशेष पहल ‘शाक सब्जी-हर घर के लिए’ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, जबकि उपभोक्ताओं तक सीधे ताजी और गुणवत्तापूर्ण सब्जियां पहुंचाई जा रही हैं। प्रतिभागियों ने इस पहल को किसान और उपभोक्ता दोनों के लिए उपयोगी बताया।

 

डेयरी कारोबार और दस्तावेजीकरण पर चर्चा –

एफपीओ सचिव आशीष यादव ने संस्था के कानूनी अनुपालन एवं दस्तावेजीकरण प्रबंधन की जानकारी दी। प्रमोटर आशीष कुमार यादव ने डेयरी व्यवसाय में उपलब्ध संभावनाओं और अपने अनुभव साझा किए। व्यवसाय समन्वयक अवधेश कुमार ने कहा कि बाजार और किसानों के बीच बेहतर तालमेल एफपीओ की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शून्य से शिखर तक का सफर बताया –

एफपीओ के व्यवसाय प्रमुख अजेंद्र सिंह ने शिवबंकी एफपीओ की स्थापना से लेकर वर्तमान स्थिति तक की व्यावसायिक यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने ब्रांड निर्माण, प्रचार-प्रसार, बाजार विस्तार और भविष्य की योजनाओं से भी प्रतिनिधियों को अवगत कराया।

कार्यक्रम के अंत में एफपीओ से जुड़े स्थानीय किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि एफपीओ से जुड़ने के बाद उन्हें कृषि सामग्री कम लागत में उपलब्ध होने के साथ ही अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिली है। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने शिवबंकी एफपीओ के मॉडल को किसान उत्पादक संगठनों के लिए उपयोगी और अनुकरणीय बताया।

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