बकरी पालन योजना बनी गरीबों की आर्थिक वृद्धि का साधन।
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रिपोर्ट – दिलशाद अहमद
बहराइच 18 मार्च।
प्रदेश में मुख्यमंत्री जी ने समाज के गरीबों, कमजोर वर्गों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों आदि सभी वर्गों के हित में विभिन्न रोजगारपरक योजनाएं संचालित की है। संचालित योजनाओं का लाभ सभी संबंधित पात्रों को मिल रहा है। इन्हीं रोजगारपरक योजनाओं में पशुधन विभाग द्वारा संचालित बकरी पालन की योजना प्रदेश के गरीबों के रोजगार के लिए प्रमुख योजना है। इस योजना से कम लागत में लाभार्थी को अधिक आर्थिक लाभ होता है।
प्रदेश में बकरी पालन की पात्रता के लिए आवश्यक है कि लाभार्थी उत्तर प्रदेश का निवासी हो और उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो। लाभार्थी संबंधित विभाग कृषि विज्ञान केन्द्र या पशुपालन विभाग से बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। बकरी पालने के लिए बाडे/सेड और चारागाह के लिए स्वयं की या पट्टा पर ली गयी जमीन होना चाहिए। आवेदक की आय विभाग द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार हों। इस योजना में बेराजगार शिक्षित युवा, महिला, गरीबों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को वरीयता दी जाती है।
आवेदन करते समय आधार कार्ड, निवास प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, भूमि से संबंधित दस्तावेज, बकरी पालन प्रशिक्षण का प्रमाण-पत्र, बैंक पासबुक की प्रति, परियाजना की रिपोर्ट, जाति प्रमाण-पत्र (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति हेतु) आवेदन के साथ संलग्न करना होता है।
प्रदेश में बकरी पालन की योजना (राज्य योजना) अनुदान-15 के अन्तर्गत सभी वर्गों के लिए बकरी पालन को रोजगार सृजन के उद्देश्य से वर्ष 2021-22 से प्रदेश के समस्त जनपदों में संचालित की जा रही है। इस योजनान्तर्गत प्रति बकरी इकाई (01 नर, 05 मादा बकरिया) लाभार्थी को उपलब्ध करायी जाती है। इस योजना में प्रति इकाई लागत रू0 45,000/- है। जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान प्रदेश सरकार द्वारा रू० 40,500/- एवं 10 प्रतिशत रू0 4,500/- लाभार्थी द्वारा वहन किया जाता है। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 739 बकरी इकाइयों की स्थापना की गयी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 739 बकरी पालन इकाइयों के लक्ष्य के विपरीत शत-प्रतिशत लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। अनुदान संख्या 83 के अंतर्गत गरीब अनुसूचित जाति/जनजाति के पात्र लोगों के लिए बकरी पालन हेतु रूपये 60,000 प्रति इकाई लागत है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान व 10 प्रतिशत लाभार्थी द्वारा वहन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 750 बकरी पालन इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित करते हुए पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है।
प्रदेश में पहली बार बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का कार्य भी प्रारम्भ किया गया है। प्रदेश के 70 जनपदों में 980 केन्द्रों के माध्यम से बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किये जाने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य हेतु वित्तीय वर्ष 2024-25 में 642 पशु चिकित्साधिकारी/पशुधन प्रभारी अधिकारी, पैरावेट को प्रशिक्षित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रथम चरण के 35 जनपदों में कुल 5,999 बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 70 जनपदों हेतु कुल 22,050 कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित करते हुए उपलब्धि प्राप्त की जा रही है।
