हत्या के मामले में दोषसिद्ध मेराज को आजीवन कारावास, 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड !
ब्यूरो चीफ – दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
बहराइच।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित अभियोगों में प्रभावी पैरवी के चलते हत्या के मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त मेराज को माननीय बाल न्यायालय/अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) बहराइच की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने विभिन्न धाराओं में कुल 1 लाख 20 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
मामला थाना रुपईडीहा क्षेत्र का है। 9 मार्च 2020 को जमींदार चौकीदार द्वारा पुलिस को सूचना दी गई थी कि गांव के खेत में एक शव पड़ा है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो शव का सिर गायब था। इस संबंध में थाना रुपईडीहा में मुकदमा अपराध संख्या 097/2020, धारा 302 व 201 भादवि के तहत अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य एवं गवाहों के बयानों के आधार पर अभियुक्तों को चिन्हित किया। मामले में सादिक अली, रियाज और सायरा के विरुद्ध आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। इन अभियुक्तों को पूर्व में 26 सितंबर 2025 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
इसी मामले में नामित सहअभियुक्त मेराज घटना के समय विधि का उल्लंघन करने वाला बालक पाया गया था। उसका प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया। अपराध को जघन्य श्रेणी का मानते हुए प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद 13 मई 2026 को मामला बाल न्यायालय को संदर्भित किया गया।
बाल न्यायालय ने मामले के उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार करने के बाद मेराज को दोषसिद्ध करते हुए विधि के अनुसार सजा सुनाई। चूंकि घटना के समय अभियुक्त बालक था, इसलिए सजा का निष्पादन किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के लागू प्रावधानों के अधीन होगा।
तीन धाराओं में मिली सजा
अदालत ने धारा 302/34 भादवि के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 120बी भादवि के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 201/34 भादवि के तहत सात वर्ष का साधारण कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड न जमा करने की स्थिति में संबंधित धाराओं में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश एवं पुलिस अधीक्षक बहराइच विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई। प्रभावी पैरवी में प्रभारी थाना रुपईडीहा हरेन्द्र कुमार मिश्रा, मॉनीटरिंग सेल, अभियोजक संत प्रताप सिंह, एडीजीसी संतोष सिंह, कोर्ट मोहर्रिर ब्रजेश साहनी तथा थाना पैरोकार कांस्टेबल अभिमन्यु कुमार यादव की भूमिका रही।
