किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा ‘पावर वीडर/टिलर’, कम लागत और समय में कर सकेंगे खेती के ये बड़े काम
संत कबीर नगर !
खेती-किसानी में लगातार बढ़ती मजदूरों की कमी और लागत के संकट के बीच आधुनिक कृषि यंत्र किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक (कृषि अभियंत्रण) डॉ. देवेश कुमार ने बताया कि पावर वीडर और टिलर छोटे एवं मध्यम जोत वाले किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। इनकी मदद से खेत की तैयारी, निराई-गुड़ाई और कतार वाली फसलों में खरपतवार नियंत्रण जैसे कठिन काम अब कम समय और कम श्रम में आसानी से किए जा सकते हैं।

मशीन की मुख्य विशेषताएं और उपयोगिता:
लागत और क्षमता: बाजार में पावर वीडर/टिलर की कीमत आमतौर पर ₹25,000 से ₹45,000 या इससे अधिक (5 से 7 हॉर्सपावर से ऊपर के मॉडलों के लिए) हो सकती है।
बचत और समय: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, सेल्फ-प्रोपेल्ड पावर वीडर की कार्यक्षमता लगभग 0.10 से 0.13 हेक्टेयर प्रति घंटा होती है। यह पारंपरिक रूप से हाथ की खुरपी से होने वाली निराई के मुकाबले समय और लागत दोनों में भारी बचत करता है।
फसलों के लिए फायदेमंद: यह मशीन सब्जियों, बागवानी फसलों, मक्का, दलहन और अन्य कतार वाली फसलों में प्रारंभिक अवस्था के दौरान खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण रखती है, जिससे फसल की पैदावार और वृद्धि अच्छी होती है।
ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतरीन मौका:
यह यंत्र केवल खेती की लागत कम करने का साधन नहीं है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए कमाई का जरिया भी बन सकता है। युवा या किसान इस मशीन को खरीदकर आसपास के किसानों को किराए पर दे सकते हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर या कृषि यंत्र सेवा केंद्र के माध्यम से लगभग ₹200 प्रति बीघा की दर से यह सेवा देकर अतिरिक्त आमदनी कमाई जा सकती है।

छोटे किसानों के लिए क्यों है खास ?
ट्रैक्टर की तुलना में आकार में छोटे और संकरी कतारों में आसानी से चलने वाले ये यंत्र उन जगहों पर बहुत कारगर हैं जहां बड़े ट्रैक्टर नहीं पहुँच सकते। डॉ. देवेश कुमार का कहना है कि आधुनिक समय में जब खेती के लिए श्रम मिलना बड़ी चुनौती है, तब पावर वीडर जैसे छोटे कृषि यंत्र किसानों का सफर आसान बना रहे हैं। यह तकनीक कम श्रम, कम समय और बेहतर कार्यक्षमता के साथ आधुनिक खेती की ओर एक मजबूत कदम है।
