उप निबंधन कार्यालय धनघटा को तहसील परिसर में शिफ्ट करने को लेकर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर दिया धरना।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जमकर किया हंगामा।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुर्दाबाद के लगाए नारे।
ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य
संतकबीर नगर –
आज दिनांक 10 अप्रैल 2026 को अप निबंधन कार्यालय धनघटा संत कबीर नगर को तहसील परिषद धनघटा संत कबीर नगर में शिफ्ट करने को लेकर तहसील बार एसोसिएशन धनघटा तथा जनपद बार एसोसिएशन संत कबीर नगर अधिवक्ताओं द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय पर दिया गया धरना।
आपको बताते चले की तहसील परिसर धनघटा संत कबीर नगर में शिफ्ट कराए जाने को लेकर अधिवक्ताओं द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय पर जमकर किया गया नारे बाजी, प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।अधिवक्ताओं ने धनघटा रजिस्ट्री कार्यालय के पास बने भवन में उप निबंधन कार्यालय बनवाने की माग किया है।
अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए जिलाधिकारी आलोक कुमार को 1 सप्ताह का समय दिया है अगर कार्य समय पर पूरा नहीं किया जा रहा है तो आगे चलकर अधिवक्ताओं ने बहुत बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया।
अधिवक्ताओं ने अपने पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी आलोक कुमार को अवगत कराया की यह कि 1997 में जब तहसील धनघटा, जिला संत कबीर नगर की स्थापना हुई तब तहसील बाढ़ शरणालय धनघटा में संचालित हुई तथा उप निबंधन कार्यालय तहसील धनघटा तहसील के पास ही किराये के मकान में संचालित हुआ।
यह कि 2008 में नव निर्मित तहसील भवन में तहसील शिफ्ट हो गई लेकिन उपनिबंधन कार्यालय किराये के मकान में ही संचालित रहा ।
यह कि तहसील परिसर धनघटा में सब ट्रेजरी कार्यालय का भवन अति आधुनिक डबल लाकर का दो मंजिला भवन करीब एक करोड़ की लागत से बना परन्तु तहसील स्तर पर सब ट्रेजरी कार्यालय निरस्त हो जाने के कारण उक्त भवन खाली पड़ा रहा। यह कि तहसील बार एसोसिएशन तहसील धनघटा के मांग पर उक्त खाली पड़ा सब ट्रेजरी कार्यालय भवन का लोकार्पण 2018 में तत्कालीन विधायक श्रीराम चौहान द्वारा उप निबन्धन कार्यालय धनघटा के नाम पर हुआ जिसमें उपनिबंधक, उपजिलाधिकारी जनता जनार्दन शामिल हुये।
यह कि उपनिबंधन कार्यालय धनघटा तहसील परिसर में लोकार्पित होने के बाद तत्कालीन उप निबंधक कहे कि कार्यालय शिफ्ट करने के लिये आई०जी० रजिस्ट्रेशन से अनुमति यह कि तत्कालीन उपनिबंधक फ्राड कर के साजिश के तहत जो अनुमति पत्र आई०जी० रजिस्ट्रेशन को भेजा उसमें तहसीलके स्थान पर पुरानी तहसील लिख कर अनुमति लेकर रातो-रात 1956 में निर्मित खंडहर भवन बाढ़ शरणालय में उक्त कार्यालय शिफ्ट कर लिया जिसके विरूद्ध तहसील बार एसोसिएशन धनघटा माननीय पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश में याचिका दाखिल किया जिस पर जिलाधिकारी संत कबीर नगर आई०जी० रजिस्ट्रेशन AIG रजिस्ट्रेशन उप निबंधक, ट्रेजरी अधिकारी आदि लोगो को समन जारी हुआ जिसमें ट्रेजरी विभाग की अनापत्ति पर सबको तलब कर सबाको सुनकर मेरिट पर आदेश हुआ कि एक सप्ताह के अन्दर उप निबंधन कार्यालय धनघटा तहसील परिसर धनघटा में स्थित लोकार्पित कार्यालय भवन में शिफ्ट किया जाय।
यह कि उक्त माननीय पिछड़ी वर्ग आयोग उ०प्र० के आदेश के विरूद्ध दस्तावेज लेखक उच्च न्यायालय लखनऊ से स्थगन प्राप्त कर लिये उक्त स्थगन आदेश अभी तक प्रभावी है।
यह कि उप निबंधन कार्यालय धनघटा के बावत् उपरोक्त विवाद को छिपाकर साजिश रच कर सरकारी धन का दुरूपयोग कर नया उपनिबंधन कार्यालय भवन निर्माण के लिये सरकारी धन रिलीज कर दिया गया।
यह कि सरकारी धन रिलीज कर उप निबंधन कार्यालय भवन का मानक तय कर निश्चित नक्शा पर निर्माण कि अनुमति दिया गया जिसकी जानकारी होने पर तहसील बार एसोसिएशन धनघटा विरोध प्रदर्शन शुरू किया और निर्माण कार्य रोका गया।
यह कि तहसील धनघटा के नाम बहुत अधिक जमीन है तहसील धनघटा की एक एकड़ भूमि में अवैध कब्जा कर थाना धनघटा का भवन व बैरिक आदि बना लिया गया करीब-करीब पाँच विस्वा भूमि थाने के दक्षिण तरफ समतल खाली है, जिसमें उपनिबंधक कार्यालय भवन बन सकता था।
यह कि उप निबंधन विभाग साजिश के तहत अवैधानिक मानक के विपरीत दान की भूमि बगैर जिलाधिकारी के अनुमति के लिया है, तहसील परिसर धनघटा में शानदार डबल लाकर का
यह कि जब भी कोई सरकारी कार्यालय भवन बनवाना होता है तब कलेक्टर से जमीन मांगी जाती है जब कलेक्टर जमीन नहीं दे पाते है. तब किसी अन्य से जमीन लिया जा सकता है। परन्तु उप निबंधन विभाग कलेक्टर से कभी जमीन नहीं मांगा।
यह कि बगैर कलेक्टर से जमीन मांगे साजिश कर भू माफिया की गड्ढे में स्थित विवादित भूमि 28×144 फिट का अवैध अनैतिक दान उप निबंधन विभाग ले लिया जिस पर बटवारा का विवाद न्यायालय सिविल कोर्ट में विचाराधीन है तथा स्थगन आदेश भी है।
यह कि उप निबंधन विभाग के नाम विवादित भूमि 28×144 फिट है जब कि निर्माण 46×80 फिट में शुरू कर दिया गया जिस पर सहखातेदारों ने आपत्ति कर दिया और जिलाधिकारी संत कबीर नगर को मजबूरन निर्माण रोकना पड़ा जिसके विरूद्ध ठेकेदार उच्च न्यायालय गया और उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी संत कबीर नगर के आदेश को मंजूरी दे दिया इसलिए स्थाई रूप से विवादित दान की भूमि में निर्माण रूक गया है।
यह कि निर्माण कार्य में मौके पर अधिकतम से अधिकतम लगभग (30 लाख) तीस लाख रूपये खर्च हुआ है निर्माण में जब कि भुगतान में पता चल रहा है कि एक करोण 29 लाख रूपये कराया गया है। ऐसी सूरत में विवादित मानक के विपरीत भूमि में गलत नक्शा बनाने वाले गलत तरीके से सरकारी धन खर्च कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से सरकारी धन की रिकवरी कराया जाना जरूरी है।
दो मंजिला उप निबंधन कार्यालय भवन का लोकार्पण हो चुका है, फिर भी उप निबंधन कार्यालय तहसील से दूर बनवाना गलत है, अनैतिक अवैधानिक कृत्य कर अधिवक्ताओं के पहुंच से दूर कार्यालय बनवाना मतलब अधिवक्ताओं को रोजी-रोटी रोकना है और सुचारू रूप से कमीशन खोरी का इंतजाम करना है।
उक्त प्रकरण की जॉच किसी सेवा निवृत्त न्यायधीश से कराकर दोषी अधिकारियों से सरकारी धन की रिकवरी कर तहसील परिसर में स्थित लोकार्पित शानदार डबल लाकर का दो मंजिला भवन में उप निबंधन कार्यालय शिफ्ट कराने की कृपा करें।
