संत कबीर नगर – 15 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के सापेक्ष DM को दिया पत्र।

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भा0 कि0 यू0 (भारत का किसान संगठन) द्वारा अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति महोदया के सापेक्ष जिलाधिकारी को दिया माँग पत्र।

ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य

संत कबीर नगर –

आज दिनांक 26 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी कार्यालय पर राष्ट्रपति महोदया के सापेक्ष जिलाधिकारी को अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा ।

आपको बताते चले की भारतीय किसान यूनियन (भारत का किसान संगठन) जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ0 नरेश टिकैत के बैनर तले संगठन के जिलाध्यक्ष राम सागर चौधरी की अध्यक्षता में अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी आलोक कुमार से मिलकर अपने जनपद की समस्याओं को माँग पत्र के रूप में देकर तत्काल निस्तारण कराने की माग किया।

अपनी माँग पत्र के माध्यम से निम्न बिंदुओं पर अपनी बात को रखा को जो निम्न बिन्दु इस प्रकार से है 

01- सभी फसलों के लिए MSP@C2+50% के साथ गारंटीड खरीद हेतु संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में तुरंत कानून पारित करें। सभी ब्लॉकों में सरकारी मंडिया स्थापित की जाए। असमय बारिश और खेती में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वर्तमान 17 % की नमी सीमा को बढ़ाकर 22% की जाए। गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य ₹500 प्रति कुंतल किया जाए और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित तुरंत निपटाया जाए।

02- किसानों और कृषि मजदूरों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना घोषित की जाए। सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा गरीब किसान, निर्धन, भूमिहीन, मजदूर परिवारों से ऊंचे ब्याज की वसूली पर नियंत्रण के लिए कानून बनाया जाए, और ऋण ग्रस्त लोगों के उत्पीड़न पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा किसानों को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए।

03- बिजली बिल 2025 तुरंत वापस लिया जाए बिजली का निजीकरण रोका जाए। स्मार्ट मीटरों पर रोक लगाई जाए, सभी परिवारों को प्रति माह 300 यूनिट और खेती में मुफ्त बिजली की व्यवस्था की जाए।

04- हाल में अधिसूचित 4 श्रम संहिताएँ सुरत वापस भी जाएं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमी के निजीकरण को समाप्त किया जाए, संगठित क्षेत्र में सुरक्षित स्थायी रोजगार दिया जाए और न्यूनतम वेलन 26000 रुपये प्रति माह तथा असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों सहित कृषि मजदूरी को 10000 रुपये मासिक वृद्धावस्था पैशन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

05- मनरेगा बजट बढ़ाकर 200 कर काम तथा 100 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित की जाय।

06- भारत पर 50% अमेरिकी शुल्क को देश की संप्रभुता पर हमला मानते हुए सख्त प्रतिकारी कार्रवाई की जाए तथा भारतीय गणराज्य की गरिमा की रक्षा की जाए। किसानी और श्रमिकों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी FTA विशेषकर कपास, डेयरी और अनाज क्षेत्र को मंजूर न किया जाए। कपास पर 11% आयात शुल्क समाप्त करने वाली अधिसूचना रद्द की जाए। PDS और PCI को संरक्षित किया जाए ताकि कृषि उत्पादों की खरीद और मुफ्त सब्सिडी खाद्‌यान्न वितरण सुनिश्चित हो सके। भारत-यूके FTA, CETA को खारिज किया जाए।

07- 84000 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी बहाल की जाए DAP और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा काला बाजारी बंट की जाए। किसानों पर नैनों यूरिया और नैनो DAP शोपना बंद किया जाए।

08- सभी भीषण बाढ़ और भूस्खलनों को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश द्वारा बाढ़ के कारणों और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन के बिना प्राकृतिक संसाधनों पर कॉर्पोरेट कब्जे के प्रभाव पर न्यायिक जांच घोषित की जाए। सभी आपदा प्रभावित राज्यों को 1 लाख करोड़ रुपये तथा पंआब को 25000 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए। बटाईदार किसानी और कृषि मजदूरों की भी मुआवजा दिया आए। असफल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को समाप्त कर सार्वजनिक क्षेत्र में फसल व पशुधन बीमा योजना बनाई आए।

09- जनता पर बुलडोजर राज समाप्त किया जाए। पुनर्वास और पुनस्थापन के बिना भूमिहीनों और गरीबी का विस्थापन रोका जाए। जबरन और अधापुध भूमि अधिग्रहण रोका जाए। LARR 2013 का सख्ती से पालन किया जाए और सभी पीडित भूमि-धारकों को मुआवजा दिया जाए।

10- राज्यों के संघीय अधिकारी की रक्षा की जाए। मजबूत राज्य, मजबूत भारत। विभाज्य पूल (गैस और अधिभार सहित) में राज्य हिस्सेदारी वर्तमान 31% से बढ़ाकर 60% की जाए। राज्य काधिकार बहाल करने के लिए GST अधिनियम में संशोधन किया जाए। MSP और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा की जाए, कृषि के आधुनिकीकरण और सहकारीकरण के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए, कृषि-आधारित उ‌द्योग विकसित किए जाएँ तथा सभी फसलों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन से होने वाले अधिशेष में किसानों और कृषि मजदूरी की साहोदारी सुनिश्चित की जाए. इस प्रकार कृषि संकट किसान आत्महत्या और मजबूरन पलायन का अंत किया जाए। राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करने वाले सभी नवउदारवादी नीति सुधार- जैसे बिजती विधेयक 2025 बीज विधेयक 2025, राष्ट्रीय सहकारिता नीति (NCP) नई शिक्षा नीति (NEP), कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नौति रूपरेखा (NPFAM) और श्रम संहिताएँ वापस लिए जाएँ।

11- संयुक्त जिला चिकित्सालय खलीलाबाद में महिला विंग में बंद बड़ा लिफ्ट मशीन तत्काल चालू कराया जाय।

12- पूर्व की भाति मकर सक्रान्ति पर ही मगहर महोत्सव बनाया जाय।

13- खलीलाबाद क्षेत्रान्तर्गत ढ़ेलुआखोर से राउतपार जाने वाली सड़क बनवायी जाय।

14- श्रीबंश हास्पिटल में मृतिका के परिजनों को न्याय दिलाते हुए प्राइवेट हास्पिटलों में फर्जी डाक्टरों की जांच हो और सरकारी डॉक्टर जो प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे है उन पर सख्त से सख्त कार्यवाही हो।

15. खलीलाबाद क्षेत्रान्तर्गत माहनपार गन्ना केन्द्र सेन्टर पर प्रतिगाडी 100/- रुपया गन्ना उत्तरवाई लिया जा रहा है तत्काल रोक लगायी जाय।

मौके पर  रामाशंकर यादव (जिला महासचिव भा0 कि0 यू0), कुतुबुद्दीन (जिला संगठन मंत्री), करम हुसैन (जिला सचिव), हरिहर यादव (तहसील अध्यक्ष), राम प्रसाद ,मुन्ना प्रसाद, चंद्रशेखर चौधरी सहित दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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