आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास के काला अध्याय को देश कभी नहीं भूल सकता – रविदास मेहरोत्रा ।
लखनऊ।
अपने नवास 31 रॉयल होटल के कमरे में हुई भारतीय लोकतन्त्र सेनानियों की बैठक को सम्बोधित कर आपातकाल मुक्ति आन्दोलन अग्रदूत विधायक रविदास मेह रोत्रा ने कहा कि 25-26 जून 1975 की मध्यरात्रि में देश में आपात काल लागू किया गया था। जिससे नागरिकों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लग गया । लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास हुआ और बड़ी संख्या में राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर दिया गया। ऐसा प्रतीत होता था कि मानो पूरा देश ही अंग्रेजों के कारागार में बदल गया हो।लखनऊ मध्य के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने आगे कहा कि वे स्वयं उस दौर के साक्षी और लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में सेनानी रहे हैं ।सेनानियों एवं नागरिक अधि कारों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष के दौरान उन्हें 22 माह तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह समय कठिन अवश्य था, लेकिन उस संघर्ष ने लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति उनके संकल्प और आस्था को और मजबूत किया।आपातकाल मुक्ति आन्दोलन के अग्रदूत रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि आपात काल का अध्याय हमें लगातार यह याद दिलाता है कि लोक तंत्र, संविधान,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं नागरिक अधि कारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ संवै धानिक मूल्यों के प्रति भी सजग रहें।इस अवसर पर लोकतन्त्र सेनानियों एवं पत्रकारों से हाल खचा खच भरा हुआ था।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी आपातकाल के इतिहास और उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान से अवगत कराया जाना चाहिए, ताकि लोकतां त्रिक मूल्यों की रक्षा का संक ल्प सदैव मजबूत बना रहे।
