सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों खर्च, शो-पीस बनकर रह गए चौराहे के फव्वारे।
संत कबीर नगर- मगहर।
नगर पंचायत मगहर में नगर की सुंदरता बढ़ाने और प्रमुख स्थानों को आकर्षक बनाने के उद्देश्य से तीन फव्वारे लगाए गए।लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए इन फव्वारों में कोई भी नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। लंबे समय से बंद पड़े फव्वारे अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं।
नगर के बाईपास चौराहा, काजीपुर चौराहा और गांधी आश्रम चौराहे पर फव्वारों के लगने नगर की सुंदरता बढ़ने की लोगों को उम्मीद थी।इससे बाहर से आने वाले पर्यटक यात्रियों को आकर्षित होने की आशा रही।इनके नियमित संचालन से नगर की खूबसूरती बढ़ेगी और यहां आने वाले लोगों को बेहतर माहौल मिलेगा। विशेष रूप से मगहर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले नगर के सौंदर्यीकरण की योजनाओं से स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी उम्मीद रहती है। फव्वारे लगाने के बाद उनके संचालन के लिए बिजली, पानी, मोटर और साफ-सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा समय-समय पर तकनीकी खराबी को दूर किया जाना भी आवश्यक है। लेकिन इन फव्वारों की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इनकी देखरेख पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।फव्वारों के बंद रहने से सौंदर्यीकरण की योजना पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। इतना ही नहीं तीन फ़व्वारोंं में सेमरा बाईपास चौराहा पुलिस चौकी के निकट लगा फव्वारा हटा दिया गया है।मात्र काजीपुर और गांधी आश्रम चौराहे पर बचा हुआ है।जो नगर पंचायत प्रशासन की लापरवाही और देखरेख के अभाव बंद हो गया है। जिसके कारण फव्वारा क्षतिग्रस्त भी हो रहा है। इसके अलावा उसमें बरसात का पानी जमा होने से जल जनित बीमारियों के पैदा होने का खतरा बना हुआ है।फव्वारे खराब हैं तो नगर पंचायत को उनकी तकनीकी जांच कराकर खराब मोटर, पाइपलाइन अथवा विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त कराना चाहिए। यदि पानी या बिजली की समस्या है तो उसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। फव्वारों को बंद छोड़ देने से न केवल नगर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी धन से तैयार की गई संपत्ति भी धीरे-धीरे खराब होने की स्थिति में पहुंच रही है। नगर की सुंदरता केवल सड़क, नाली और भवन बनाने से नहीं बढ़ती, बल्कि लगाए गए सजावटी संसाधनों का नियमित संचालन भी जरूरी है। यदि फव्वारे लगाए गए हैं तो उन्हें निर्धारित समय पर चलाया जाना चाहिए, ताकि नगरवासियों के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों को भी इसका लाभ मिल सके।फव्वारे लगाए तो गए हैं, लेकिन चलते नहीं हैं तो उनका होना और न होना एक जैसा है। ऐसे में ये फव्वारे ‘हाथी के दांत, खाने के और दिखाने के और’ वाली कहावत को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि योजनाओं पर पैसा खर्च करने के साथ ही उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जिससे सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।इस संबंध में प्रभारी ईओ सीमा राय ने बताया कि फव्वारे क्यों बन्द पड़े हैं इसको देखवाते हैं।उसे चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।
