NHM संविदा कार्मिकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा ।
NHM संविदा कार्मिकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा ।
संतकबीर नगर ।
संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ और भारतीय मजदूर संघ के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रव्यापी ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन देशभर के जिला मुख्यालयों पर किया गया, इसी क्रम में संत कबीर नगर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) उत्तर प्रदेश के अंतर्गत कार्यरत संविदा कार्मिकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा।
संविदा कार्यकारियों का कहना है कि वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य करने के बावजूद उन्हें वेतन विलंब, सेवा असुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

संविदा कर्मियों ने प्रश्न उठाया है कि जब कोविड महामारी जैसे कठिन समय में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन सेवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का संचालन पूरी निष्ठा से किया, तो आज उनके वेतन का नियमित भुगतान क्यों सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है?
वेतन भुगतान में देरी पर सवाल-
कर्मियों के अनुसार दीपावली 2025 से वेतन भुगतान में लगातार विलंब हो रहा है।
SNA-e SPARSH प्रणाली में तकनीकी बाधाओं के कारण समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा, जिससे हजारों परिवार आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक माह की 3 तारीख से पूर्व वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा लंबित वेतन का तत्काल निस्तारण हो।
स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की मांग-
कार्मिकों ने प्रदेश के कुल बजट का न्यूनतम 9-10 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र को आवंटित करने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा ही राज्य की प्रगति का आधार होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में बजट आधारित स्वास्थ्य मॉडल से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

नियमितीकरण और समायोजन का मुद्दा-
10 वर्ष या उससे अधिक समय से सेवा दे रहे कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर भी सवाल उठाया गया है। मांग की गई है कि IPHS मानकों के अनुरूप नए पद सृजित कर अनुभवी कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए। साथ ही स्पष्ट और पारदर्शी वेतन नीति लागू कर वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है।
सामाजिक सुरक्षा और सेवा स्थिरता-
ज्ञापन में स्वास्थ्य बीमा, EPF, ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने, वार्षिक एग्रीमेंट व्यवस्था समाप्त करने तथा दीर्घकालीन संविदा प्रणाली लागू करने की मांग भी शामिल है। इसके अतिरिक्त सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को स्वास्थ्य समिति या आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने की बात कही गई है।

सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा-
संविदा कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। उनका कहना है कि यदि कार्मिक सुरक्षित और सम्मानित होंगे, तो स्वास्थ्य सेवाएं भी अधिक प्रभावी होंगी।
इस कार्यक्रम में सैकड़ों संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।
