भक्त के वश में भगवान होते है *उनके एक ही पुकार पर प्रभु दौडे चले आते
भक्त के वश में भगवान होते है *उनके एक ही पुकार पर प्रभु दौडे चले आते
दिलशाद अहमद
आज का भारत लाइव
रिसिया, बहराइच
भक्त और भगवान का अटूट संबंध होता है ,भक्तो के एक ही पुकार पर प्रभु दौड़े चले आते है। भक्ति भाव से भगवान प्राप्त होते है। भक्तो के वश में भगवान होते है ,यह उदगार श्री मद भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक प रवि शंकर गुरु भाई ने श्रद्धालुओं से बताया है।
रिसिया के पंचवटी श्री सीता राम आश्रम के तीसरे दिन ध्रुव जी पर कथा सुनाई गई। जब ध्रुव जी महाराज ने पांच वर्ष की अवस्था मे भगवान को प्राप्त कर लिया, भक्ति को प्राप्त करने के लिए कोई अवस्था नही होती है। मनुष्य सच्चे मन से कभी भी भक्ति को प्राप्त कर सकता है। ध्रुव जी उत्तानपाद के पुत्र थे, उत्तानपाद दो रानियां थी,सुमति और सुरुचि थी सुरुचि के द्वारा ध्रुव की अपमान करने पर वे भगवान की शरण में चले गए और पांच वर्ष की अवस्था में भगवान को प्राप्त कर लिया। इसी प्रकार भक्त प्रह्लाद जो हिरणाकश्यप के पुत्र थे, उन्होंने अपनी तपस्या के बल भगवान को प्राप्त कर लिया।भागवत में गजराज का प्रसंग आता है ,जब संकट में प्राण आए तब गजराज ने भगवान को पुकारा,भगवान रक्षा करने के लिए दौड़ पड़े,जिसकी रचना सूरदास जी ने की है इस दौरान भजनों की वर्षा हुई, हे गोबिंद गोपाल अब तो जीवन हारे हम है आपके सहारे।
इस अवसर पर अशोक शुक्ल, प्रेम गोयल, सुदीश अग्रवाल ,राजेश गोयल, रोहित नागलिया, रवि गुप्ता, उमेश गर्ग, सोनू, सरोज शर्मा, अशोक शर्मा, सहित मौजूद रहे।
