संत कबीर नगर – विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकत्रियों ने DM को दिया ज्ञापन।

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आशा कार्यकर्ताओं द्वारा आशा कर्मियों की प्रोत्साहन राशियों के लम्बित भुगतान व वर्षों से उठाई जा रही मांगो को लेकर मुख्यमंत्री के सापेक्ष जिलाधिकारी को दिया गया ज्ञापन।

ब्यूरो रिपोर्ट- के0 पी0 मौर्य

संत कबीर नगर-

आज दिनांक 26 नवंबर 2025 को आशा कर्मियों की प्रोत्साहन राशियों के लम्बित भुगतान व वर्षों से उठाई जा रही मांगो के को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सापेक्ष जिलाधिकारी को लिखित ज्ञापन देकर तत्काल मागों को पूरा करने की माग किया।

आपको बताते चले कि आशा कर्मियों की जिलाध्यक्षा सरोज यादव ने कहा की प्रोत्साहन राशियों के लम्बित भुगतान व वर्षों से उठाई जा रही मागों के प्रति बरती जा रही उदासीनता के कारण

प्रदेश में अपनी सेवाएं दे रही आशा और आशा संगिनी का वर्ष 2025 के कई माह के आधार भुगतान, राज्य प्रदत्त अनुतोष राशि, प्रोत्साहन राशियों और राष्ट्रीय अभियानों के प्रतिफल बकाया है।

कई स्तरों पर आवाज उठाने के बावजूद उनके ही पारिश्रमिक की अदायगी करने के बजाय निरंतर अनसुना किया गया।

गौर तलब है कि प्रदेश में आशा और संगिनी वर्षों से राज्य और केंद्र के अनेक कार्यों की घोषित प्रोत्साहन राशियों से वंचित हैं और सरकारों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वादा खिलाफी की शिकार हैं।

2019 से लम्बित भुगतानों की अदायगी के सम्बन्ध में पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से प्रदेश की आशा और संगिनी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही हैं। किंतु उनकी आवाज को सुनना भी उचित नहीं समझा गया। प्रधान मंत्री जी की सबसे बड़ी लोकहिताय योजना आरोग्य भारत के सपने को साकार करने में गोल्डन आयुष्मान कार्ड, आभा आई डी बनाने में किए गए वर्षों से अब तक किए गए योगदान के रु 225 करोड़ में एक रुपए भी आशाओं को नहीं दिया गया। शायद आशा और संगिनी के साथ इन दोनों कार्यों के लिए आपके मातहतों द्वारा की गई क्रूरता और उत्पीड़न याद नहीं होगा।

विगत 6 अक्टूबर 2025 को दिए गए ज्ञापन में और उसके बाद माननीय स्वास्थ्य मंत्री महोदय को दिए गए मांग पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि संपूर्णला में मांगों के समाधान के लिए 30 अक्टूबर 2025 तक त्रिपक्षीय वाली बुलाई जाय, साथ ही वर्ष 2025 के समस्त बकाया का त्वरित भुगतान किए जाने की याचना की गई थी। किंतु न तो पूर्णतया भुगतान ही किए गए और न ही सरकार ‌द्वारा त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने में कोई रुचि दिखाई गड़ा

1 नवम्बर 2025 को पूर्ण कार्यबंदी के बाबजूद भी 6 अक्टूबर को माननीय मुख्यमंत्री महोदय और 13 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री महोदय और आपको भेजे गए मांगपत्र और साथ में ही मांगों के न पूरे होने की दशा में अभी तक भुगतान भी नहीं किए गए और न ही अन्य मांगों का ही समाधान किया गया। समय वार्ता बुलाकर मांगी को पूरा किया गया तो 15/12/2025 को अनिश्चित कालीन राज्य व्यापी हड़ताल का हड़ताल के लिए विवश होना पड़ेगा।

अतः निम्न मांगों के समर्थन में अनिश्चित कालीन हडताल इस परिस्थिति के लिए वर्षों से जारी निशन निदेशालय की सनमानी और सरकार की अनदेखी पूरी तरह से जिम्मेदार होगी।

आशाओं की प्रमुख मांगें इस प्रकार से है

1. वर्ष 2025 का कई माह के बकाया आधार प्रोत्साहन राशि, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति राशि और अन्य अभियानों में किए गए योगदान के भुगतान तत्काल किए जाएं तथा 30 अक्टूबर तक वर्षों से लम्बित प्रोत्साहन राशियों की अदायगी सुनिश्चित की जाय।

2_ आशा, आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक (honorary volunteer) के बजाय 45 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की तिफारिश के अनुरूप सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाय तथा प्रोत्साहन राशि के बजाय न्यूनतम वेतन लागू किया जाए।

3. आशा, आशा संगिनी को ईपीएफ, ईएसआई का सदस्य बनाया जाए।

4_ सेवा निवृति पर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

5_10 लाख स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा सुनिश्चित किया जाए।

6._ बेहतर कार्य दशा उपलब्ध कराते हुए कार्य की सीमा तय की जाए। एक ही दिन में कई कई तरह के कार्यों के संपादन और जीवन निर्वाह लायक पारिश्रमिक नहीं मिलने के कारण इनका एक विशाल हिस्सा अवसाद से गुजर

रहा है।

 

7_ न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को आधारभूत मानदेय 21000 / तथा आशा संगिनी को रु 28000 / किया जाए। जननी सुरक्षा से जुड़े बुनियादी कार्य के अलावा अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशियों का निर्धारण कर नियमित और पारदर्शी ढंग से भुगतान किया जाए।

8_ आशा संगिनी कर्मियों को भ्रमण यात्रा भत्ता दिया जाए या उनके आवागमन के लिए स्कूटी उपलब्ध कराई जाए।

9 _ आशा व आशा संगिनी को उच्च गुणवत्ता वाले 5 जी मोबाइल और तेज इंटरनेट सेवा प्रदाता कम्पनी के सिम

उपलब्ध कराएं जाएं साथ ही डेटा ऑपरेटर के रूप में लिए जाने वाले कार्यों के पारिश्रमिक का निर्धारण कर भुगतान

सुनिश्चित की जाए।

10 गोल्डन आयुष्मान कार्ड और आभा परिचय पत्र के सृजन में किए गए योगदान का बिहार राज्य की तरह 15 रु प्रति की दर से सितम्बर 2025 तक का रु 225.2 करोड़ का भुगतान एकमुश्त किया जाए।

11_वर्ष 2018 से 2025 तक विभिन्न दुर्घटनाओं में मृतक आशा, आशा संगिनी के परिजनों को अनुमन्य 2 लाख की बीमित राशि और 10 लाख रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में आश्रितों को भुगतान किए जाएं।

12 निजी अस्पतालों का रुख करने वाली गर्भवतियों के साथ किसी अप्रिय स्थिति के उत्पन्न होने पर अकारण आशा कमी की अपराधिक मुकदमे में फंसाया जाता है। इस स्थिति के लिए निजी अस्पतालों और अभिभावकों को जवाबदेह बनाया जाए और अपराधिक मुकदमे झेल रही निर्दोष आशा कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।

13. वर्ष 2019 से लेकर 2024 तक की बकाया सभी प्रोत्साहन राशियां और राज्य प्रदत्त अनुग्रह राशियों के भुगतान के अलावा वर्षों से लम्बित राशियों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

14_ सभी जिलों में लैंगिक उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए जीएसकैश का गठन किया जाए और कमेटियों में आशा, संगीनियों को प्रतिनिधित्व दिया जाय।

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